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अमेरिका में भागवताचार्य कृष्णचन्द्र शास्त्री ने समझाया ईश्वरीय भक्ति का मर्म

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अमेरिका में भागवताचार्य कृष्णचन्द्र शास्त्री ने समझाया ईश्वरीय भक्ति का मर्म


लॉस एंजिल्स (अमेरिका), 08 सितंबर (हि.स.)। कनाडा और अमेरिका के एक माह के दौरे पहुंचे भारत के प्रमुख भागवत कथावाचक ठाकुर पंडित कृष्णचन्द्र शास्त्री ने शनिवार को यहां कहा कि आनंद सर्वोच्च ईश्वरीय भक्ति है। इसका कोई विकल्प नहीं है। इसके लिए मनुष्य का प्रत्येक अवस्था में आनंदित रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस समय भक्तिकाल चल रहा है। देश-विदेश में इन दिनों कथावाचकों की सभाओं में हजारों-लाखों भक्त आ रहे हैं। संतों को सुन रहे हैं।

अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के वरिष्ठ पत्रकार ललित मोहन बंसल की रिपोर्ट के अनुसार, लॉस एंजिल्स की भागवत कथा में शास्त्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय कथा के प्रश्नों और उत्तर पर मनन कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने विशेषकर कनाडा और अमेरिका की चर्चा की। उनका कहना है कि कनाडा और अमेरिका की सभाओं में हजारों लोग कथा सुनने आ रहे है। वह चार सितंबर को न्यू जर्सी में थे , जहां एक विशाल वेद मंदिर में हजारों लोग उमड़ पड़े। उन्होंने भारत में बिहार के आरा जिले की भागवत कथा का भी उदाहरण दिया, जहां लाखों लोग पहुंचे।

कनाडा और अमेरिका की तीस दिवसीय यात्रा के अपने दूसरे पड़ाव में यहां ठाकुर कृष्णचंद्र ने लास एंजिल्स के पासाडेना हिंदू मंदिर में दिन भर बरसात के बावजूद पहले दिन की भागवत कथा पूरी की। उन्होंने कहा कि आनंद वस्तुत: ईश्वरीय आनंद है। उन्होंने कहा कि खानपान और भांति-भांति के व्यंजनों का सेवन जिव्हा का स्वाद मात्र है। परमात्मा सर्वत्र है। मनुष्य को मनसा, वाचा और कर्म से होने वाले पाप से बचना चाहिए।

उन्होंने पाप से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पाप की सजा भुगतने से बच पाना मुश्किल है। दिनभर की बरसात के बावजूद मंदिर में ठाकुर जी की कथा सुनने के लिए सैकड़ों सनातनी मौजूद रहे। मंदिर के पदाधिकारियों में डॉक्टर निर्मल कुमार, डॉक्टर मंजू कुमार, सुश्री रीमा, श्री ओझा और मंदिर के पुजारी जगदीश राजगौर ने पूरे आदरभाव से ठाकुर कृष्ण चन्द्र की आरती उतारी। इससे पूर्व भारतीय परिधान में 21 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा की ठाकुर कृष्णचंद्र ने अगुआई की। उन्होंने निर्माणाधीन पासाडेना हिंदू मंदिर निर्माण में अधिकाधिक सहयोग देने की अपील भी की।

ठाकुर कृष्णचंद्र ने कथा के दिन तेजी से हुई बरसात को शुभ बताया और ‘राधे राधे, गोविंद राधे के संकीर्तन के साथ भगवत की पहले दिन की कथा की शुरुआत की। 76 वर्षीय ठाकुर कृष्णचन्द्र देश-विदेश में पिछले 52 वर्ष में 1600 भागवत कथा कर चुके है। वह पिछले तीन दशक से लगातार कनाडा और अमेरिका के विभिन्न मंदिरों और सभास्थलों में भागवत कथा कर रहे हैं।

कथा के पहले दिन की शुरुआत में उन्होंने कहा कि भगवान सत्, चित, आनंद है। वह सर्वत्र है। भगवान निर्गुण है इसलिए सगुण है। तत्पश्चात उन्होंने पहले दिन की कथा में शुकदेवजी के धरती पर आने, अमरनाथ में शिवजी से श्रीमद्भागवत की चोरी से कथा सुनने, नेमीशरण्य में शौनक आदि ऋषियों से सूत जी के मिलने और सूत जी से छह प्रश्न पूछने की कथा कहीं। उन्होंने बिहार की शिक्षा-दीक्षा और इसके महामात्य की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, इस प्रदेश ने देश को बड़ी संख्या में आईएएस प्रदान किए हैं, जो सरकार के उच्च पदों पर आसीन हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद