home page

हिमालयी पर्यावरण पर नाहन में हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 400 शोध पत्र प्रस्तुत

 | 

नाहन, 24 फ़रवरी (हि.स.)।

डॉ. वाई.एस. परमार पीजी कॉलेज नाहन में भूगोल विभाग ने ‘हिमालयी पर्यावरणीय समस्याएं एवं आपदा जोखिम: बहुविषयक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। यह नाहन कॉलेज और सिरमौर जिले के इतिहास का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रहा, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लेकर हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरणीय संकट और आपदा जोखिम पर व्यापक चर्चा की।

हिमालय को पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, हिमनदों के पिघलने, वनों की कटाई, जैव विविधता में कमी, अनियोजित शहरीकरण, पर्यटन दबाव और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई गई। साथ ही क्लाउडबर्स्ट, आकस्मिक बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, हिमस्खलन और हिमनदी झील विस्फोट जैसी आपदाओं की बढ़ती घटनाओं को मानव जीवन, अवसंरचना और आजीविका के लिए बड़ा खतरा बताया गया। इन समस्याओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेप, समेकित योजना और बहुविषयक सहयोग पर जोर दिया गया।

सम्मेलन में भूगोल, पर्यावरण विज्ञान, भूविज्ञान, जलविज्ञान, जलवायुविज्ञान, अभियांत्रिकी, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सामाजिक विज्ञान, लोक नीति और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को जोड़ते हुए सतत विकास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियों पर विचार हुआ। देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 540 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में नासा, इसरो, भारत मौसम विज्ञान विभाग सहित कनाडा, जर्मनी, इक्वाडोर और थाईलैंड के विशेषज्ञों ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। 11 तकनीकी सत्रों में 400 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें जलवायु परिवर्तन, हिमालयी भू-आकृति विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण, जलागम प्रबंधन, सामुदायिक आपदा प्रबंधन, GIS और रिमोट सेंसिंग, जलवायु मॉडलिंग, पूर्व चेतावनी प्रणाली और SDGs से जुड़े नीति ढांचे पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्राचार्य डॉ. वी.के. शुक्ला ने इसे कॉलेज की ऐतिहासिक शैक्षणिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह मंच वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को हिमालयी चुनौतियों के समाधान के लिए उपयोगी सुझाव देने का अवसर प्रदान करता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर