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हिमाचल में मनरेगा कर्मियों को राहत, मानदेय में नहीं होगी कोई कटौती

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शिमला, 19 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मनरेगा (वीबीजी रामजी योजना) से जुड़े कर्मचारियों को मानदेय को लेकर बड़ी राहत मिली है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एक जुलाई 2026 से लागू की गई नई व्यवस्था के बाद किसी भी कर्मचारी को पहले से कम भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार ने संशोधित आदेश जारी करते हुए कहा है कि कर्मचारियों को मिलने वाला निश्चित मासिक मानदेय उस सकल मासिक पारिश्रमिक के बराबर होगा, जो उन्हें 30 जून 2026 तक मिल रहा था।

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी शुद्धिपत्र में पहले जारी आदेश के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के बाद यह स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है कि नई व्यवस्था के कारण मनरेगा कर्मचारियों के मानदेय में किसी तरह की कटौती नहीं होगी। पिछले कुछ समय से कर्मचारियों के बीच यह आशंका बनी हुई थी कि निश्चित मासिक मानदेय लागू होने के बाद उनकी आय प्रभावित हो सकती है। सरकार के नए स्पष्टीकरण से इस आशंका पर विराम लग गया है।

संशोधित आदेश के अनुसार मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों का मानदेय अब एक निश्चित राशि के रूप में तय किया जाएगा। यह राशि उस कुल मासिक पारिश्रमिक के बराबर होगी, जो संबंधित कर्मचारी को 30 जून 2026 तक प्राप्त हो रहा था। यानी नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की मासिक आय में कोई कमी नहीं आएगी। सरकार ने साफ किया है कि एक जुलाई 2026 से मानदेय निर्धारण इसी आधार पर किया जाएगा।

ग्रामीण विकास विभाग ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान ग्राम विकास एवं रोजगार गारंटी योजना की प्रशासनिक निधि से किया जाएगा। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप धनराशि का आवंटन और उपलब्धता जरूरी होगी। विभाग का कहना है कि भुगतान की व्यवस्था मौजूदा वित्तीय प्रावधानों के तहत ही की जाएगी।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने इस विषय में 27 जून 2026 को एक कार्यालय आदेश जारी किया था। इसके प्रावधान चार जुलाई 2026 को हिमाचल प्रदेश राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे। बाद में केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसी के आधार पर राज्य सरकार ने अब आदेश के पैरा तीन और चार में संशोधन किया है। आदेश की अन्य सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा