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सुक्खू सरकार ने बनाया प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग, छह महीने में आएगी रिपोर्ट

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सुक्खू सरकार ने बनाया प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग, छह महीने में आएगी रिपोर्ट


शिमला, 14 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की संभावनाओं और मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर अब आयोग समीक्षा करेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने जिलों से लेकर उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया है। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। हिमाचल में वर्तमान में 12 जिले हैं। राज्य के सबसे बड़े जिलों में शामिल कांगड़ा और मंडी में लंबे समय से नए जिले बनाने की चर्चा होती रही है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में किसी नए जिले के गठन की न घोषणा की गई है और न ही कोई जिक्र किया गया है। आयोग को प्रशासनिक इकाइयों की जरूरत का आकलन कर सरकार को सिफारिशें देनी हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित किया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी (सेवानिवृत्त) आयोग के अध्यक्ष होंगे। अधिवक्ता विशाल पंवार और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है। भूमि अभिलेख विभाग के निदेशक आयोग के सदस्य सचिव होंगे।

जिलों से लेकर तहसीलों तक की व्यवस्था की होगी समीक्षा

आयोग राज्य के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा करेगा। इसमें जिले, उपमंडल, तहसील, उपतहसील, विकास खंड और विभिन्न विभागों के अन्य प्रशासनिक प्रभाग शामिल हैं। आयोग यह आकलन करेगा कि कहां नई इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों का विलय करने, उनका विभाजन करने या पुनर्गठन की जरूरत है।

इस प्रक्रिया में आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों, आवागमन की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और आम लोगों की सुविधा को आधार बनाया जाएगा। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करते समय संबंधित पक्षों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से परामर्श भी करना होगा। पहाड़ी राज्य में दूरदराज के क्षेत्रों से सरकारी कार्यालयों तक पहुंच और प्रशासनिक सेवाओं की उपलब्धता भी इस समीक्षा के अहम पहलू होंगे।

प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन में केवल क्षेत्रीय जरूरतों को ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयोग नई इकाइयां स्थापित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों पर आने वाली लागत का अनुमान लगाएगा। इसके साथ ही मौजूदा कार्यालयों को अधिक प्रभावी बनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के उपाय सुझाएगा।

सरकार ने आयोग को ऐसे सुझाव देने का दायित्व सौंपा है, जिनसे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ाए बिना प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। ऐसे में किसी नई इकाई के गठन की जरूरत के साथ उसके संचालन पर होने वाले खर्च और कर्मचारियों की आवश्यकता का भी आकलन किया जाएगा। हालांकि, अधिसूचना में किसी भी जिले को विभाजित कर नए जिले बनाने का कोई विशेष निर्देश नहीं दिया गया है।

शिमला में होगा मुख्यालय, छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट

आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को जरूरी सचिवालय सहायता, अभिलेख और जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध करवाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग आयोग के लिए कार्यालय परिसर, मंत्रालयिक कर्मचारी, वाहन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं करेगा।

आयोग का कार्यकाल अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह महीने होगा। इस अवधि में उसे विशिष्ट सिफारिशों के साथ अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को समकक्ष रैंक के अधिकारियों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता मिलेगा। आधिकारिक कार्यों के लिए उनकी पात्रता के अनुसार सरकारी वाहन उपलब्ध करवाए जाएंगे। अध्यक्ष और सदस्यों को मिलने वाला मानदेय राज्य सरकार तय करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा