शिमला में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, भारत की अर्थव्यवस्था पर मंथन
शिमला, 08 मई (हि.स.)। शिमला में नए वैश्विक आर्थिक क्रम में भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। यह सम्मेलन कोटशेरा कॉलेज शिमला और देश भगत यूनिवर्सिटी, मंडी गोबिंदगढ़ पंजाब के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को शुरू हुआ। सम्मेलन में देश और विदेश से पहुंचे अर्थशास्त्री, शोधार्थी और शिक्षाविद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
सम्मेलन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश शिमला विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो महावीर सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह लक्ष्य केवल सामूहिक प्रयासों से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और आर्थिक, पर्यावरणीय तथा तकनीकी चुनौतियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के सुझाव और शोध देश की आर्थिक नीतियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन युवाओं और शोधार्थियों को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को समझने का अवसर देते हैं। साथ ही इससे भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नई कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
सम्मेलन में रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के महानिदेशक सचिन शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में दुनियाभर में आर्थिक और वित्तीय हालात तेजी से बदले हैं, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां हैं, लेकिन भारत लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस कर रहा है और इसके लंबे समय में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
सचिन शर्मा ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।
इस मौके पर कोटशेरा कॉलेज के प्रधानाचार्य गोपाल चौहान, जेएनयू दिल्ली की प्रोफेसर नंदन नॉन और देश भगत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर हर्ष सदावर्ती ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में भारत के लिए नई नीतियों, तकनीक और शोध आधारित विकास पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

