home page

शिमला में किसान–बागवानों का प्रदर्शन, सचिवालय के बाहर डटे, सड़कें जाम

 | 
शिमला में किसान–बागवानों का प्रदर्शन, सचिवालय के बाहर डटे, सड़कें जाम


शिमला, 19 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल किसान सभा और सेब उत्पादक संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान और बागवान सोमवार को शिमला की सड़कों पर उतर आए। टोलैंड से सचिवालय तक निकाले गए मार्च के बाद प्रदर्शनकारी सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों की जमीन से बेदखली रोकने, विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को लागू करने सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के चलते सचिवालय के बाहर हालात तनावपूर्ण बने रहे और यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।

किसान–बागवानों की प्रमुख मांगों में भूमिहीन किसानों को पांच बीघा जमीन देने, दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये तय करने, आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने और स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर रोक लगाने की मांग शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ते बिजली बिलों से किसान परेशान हैं और वे भारी भरकम बिल चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने सेब उत्पादकों के लिए मिलने वाली एमआईएस (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम) के तहत सहायता राशि बंद होने का मुद्दा भी उठाया और इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार, दोनों को जिम्मेदार ठहराया।

धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर को गरीब और सीमांत किसानों को जमीन देने के लिए नीति बनाने के आदेश दिए थे, लेकिन एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने किसानों और बागवानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और आर–पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने दूध उत्पादकों और आपदा प्रभावित लोगों की मांगों को भी तुरंत मानने की जरूरत बताई।

राकेश सिंघा ने इस दौरान एसजेवीएनएल पर भी गंभीर आरोप लगाए और निगम को प्रदेश का दूसरा “लुटेरा” बताया। उन्होंने फोरलेन निर्माण के नाम पर हो रही कथित मनमानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे प्रभावित लोगों को न्याय मिलना चाहिए। उनका कहना था कि जब तक सरकार सभी मांगों को लेकर ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस प्रदर्शन का असर शिमला के यातायात पर भी साफ दिखाई दिया। सचिवालय के बाहर धरने के कारण शिमला से संजौली वाया छोटा शिमला जाने वाली सड़क पर दिन के समय लंबा जाम लगा रहा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा