home page

मां त्रिभुवनी मंदिर में उमड़ी आस्था, हिमाचल-हरियाणा के श्रद्धालुओं ने पालतू पशुओं की सलामती के लिए चढ़ाया घी-मक्खन

 | 

नाहन, 28 जून (हि.स.)। जिला सिरमौर की नाहन विधानसभा क्षेत्र की कौलांवालाभूड़ पंचायत स्थित त्रिभुवनी (त्रिभोणी) मंदिर में आषाढ़ माह के चारों रविवार को लगने वाले पारंपरिक मेले में हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के मोरनी क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।यहां श्रद्धालु अपने पालतू और दुधारू पशुओं की सलामती, बीमारियों और जंगली जानवरों से रक्षा की कामना लेकर मां त्रिभुवनी के दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाता है।

त्रिभुवनी मंदिर को पशुओं की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। यहां प्रतिवर्ष आषाढ़ और मार्गशीर्ष माह के चारों रविवार को मेले का आयोजन होता है। ये मंदिर नाहन से 35 किलोमीटर, सराहां से 25 किलोमीटर, कौलांवालाभूड़ से तीन किलोमीटर और हरियाणा के मोरनी से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ग्रामीण अनिल ठाकुर, राजन पुंडीर, संजीव ठाकुर, अनु राणा, वंदना ठाकुर, रुकमणी देवी, सुधीर ठाकुर और राकेश शर्मा ने बताया कि जब दुधारू पशु नए बछड़े या बछड़ी को जन्म देते हैं तो पहले सप्ताह के दूध से तैयार घी और मक्खन माता को भेंट स्वरूप अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु पूरे वर्ष अपने पालतू पशुओं की जंगली जानवरों, बीमारियों और जहरीले कीट-पतंगों से रक्षा की कामना भी करते हैं।

नाहन, पच्छाद, धारटीधार और पांवटा साहिब उपमंडल के कई इलाकों के पशुपालक भी अपने दुधारू पशुओं का घी और मक्खन मंदिर में चढ़ाते हैं। इसके बाद मंदिर के पुजारी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद स्वरूप रक्षा के चावल प्रदान करते हैं और अगले वर्ष भी माता के दरबार में घी और मक्खन अर्पित करने का आशीर्वाद देते हैं।

मंदिर के पुजारी लकी शर्मा ने बताया कि आषाढ़ मास के दूसरे रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने त्रिभुवनी मंदिर पहुंचकर माता का आशीर्वाद लिया। मंदिर कमेटी और पुजारियों की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर