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किन्नौर कैलाश यात्रा शुरू, रोजाना 375 श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति

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शिमला, 30 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में शामिल किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 गुरुवार से विधिवत शुरू हो गई। सावन महीने में होने वाली यह पवित्र यात्रा आज से 10 अगस्त तक चलेगी। जिला प्रशासन ने यात्रा के मद्देनजर सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने का दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा की अवधि में जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किया जा सकता है। किन्नौर व आसपास के इलाकों में आज बादल छाए हुए हैं।

यात्रा समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम कल्पा प्रवीण कुमार भारद्वाज ने बताया कि रेकी टीम की अंतिम सिफारिशों के बाद यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया गया। इससे पहले यात्रा मार्ग का दो चरणों में निरीक्षण किया गया था। शुरुआती निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा सामने आया था, जिसके कारण यात्रा शुरू करने का फैसला कुछ समय के लिए रोका गया। बाद में संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा और मरम्मत का काम पूरा होने के बाद यात्रा शुरू करने की अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित विभागों को पहले ही आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।

प्रशासन के अनुसार इस वर्ष प्रतिदिन अधिकतम 375 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी। इनमें 175 श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण, 125 श्रद्धालु ऑफलाइन पंजीकरण और 75 श्रद्धालु एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (ओए श्रेणी) के माध्यम से यात्रा कर सकेंगे। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि ऑफलाइन पंजीकरण यात्रा शुरू होने के साथ आरंभ कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण किसी भी श्रद्धालु को यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस वर्ष यात्रा केवल तंगलिंग–मेलिंग खट्टा–गुफा मार्ग से संचालित की जा रही है। पूरे मार्ग पर पुलिस, स्वास्थ्य, वन, होमगार्ड, जल शक्ति और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। अलग-अलग पड़ावों पर डॉक्टर, फार्मासिस्ट और पुलिस कर्मी भी मौजूद रहेंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

एसडीएम प्रवीण कुमार भारद्वाज ने कहा कि यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर रहेगा। किसी भी श्रद्धालु को यात्रा मार्ग पर गंदगी फैलाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से केवल अधिकृत पंजीकरण के माध्यम से यात्रा करने और प्रशासन की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करें।

उल्लेखनीय है कि किन्नौर कैलाश तिब्बत सीमा के निकट समुद्र तल से लगभग 6,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे पंच कैलाशों में से एक माना जाता है। यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती के प्रथम मिलन से जुड़ा माना जाता है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष सावन महीने में हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर किन्नौर कैलाश की यात्रा करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा