home page

नशे और एचआईवी के खिलाफ युवा आगे आएं : धनीराम शांडिल

 | 
नशे और एचआईवी के खिलाफ युवा आगे आएं : धनीराम शांडिल


शिमला, 12 अगस्त (हि.स.)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने युवाओं से नशे और एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं और युवा स्वस्थ होंगे तो देश भी स्वस्थ और मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को एचआईवी और नशे से मुक्त बनाने के लिए सरकार के साथ समाज और युवाओं की भागीदारी भी जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और हिमाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति की ओर से शिमला के होटल पीटरहॉफ में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

डॉ. शांडिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एचआईवी और एड्स के खिलाफ लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के सुरक्षित जिलों की सूची में हिमाचल के तीन जिले किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सोलन शामिल हैं। तीन अन्य जिले भी सक्षम श्रेणी में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यूएनएड्स के 95-95-95 लक्ष्य को हासिल करने में हिमाचल देश में आगे है। जागरूकता अभियानों के जरिए गांव-गांव तक लोगों को एचआईवी और एड्स के बारे में जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज युवाओं के सामने नशा एक बड़ी चुनौती है। नशे की चपेट में आने वाले कुछ युवा एचआईवी संक्रमण का भी शिकार हो रहे हैं। प्रदेश में नशे से छुटकारा दिलाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और एचआईवी से संक्रमित लोगों को उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश में 17 ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 1,023 मरीजों का उपचार चल रहा है। इन केंद्रों में चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों की नशे की तलब धीरे-धीरे कम करने का उपचार किया जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 294 इंजेक्शन से नशा लेने वाले लोगों को अस्पतालों के मनोरोग विभागों से जोड़ा गया है और उनका उपचार किया जा रहा है। करीब 1,000 आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदेश के पांच जिलों के 2,440 गांवों में 2.86 लाख परिवारों को एचआईवी के बारे में जागरूक किया गया है।

डॉ. शांडिल ने कहा कि 2 अक्टूबर 2025 को प्रदेश की पंचायतों में एचआईवी मुक्त हिमाचल की शपथ दिलाई गई थी। इस अभियान से अभी तक करीब 25 लाख लोगों को जोड़ा जा चुका है। प्रदेश की जेलों में भी करीब 11,000 कैदियों को एचआईवी के बारे में जागरूक किया गया है और 9,000 कैदियों की एचआईवी जांच की जा चुकी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा