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वीबी-जी-रामजी योजना से हिमाचल पर सालाना 164 करोड़ रुपये का बोझ, मजदूरों की दिहाड़ी भी घटेगी : मंत्री अनिरुद्ध सिंह

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शिमला, 25 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में किए जा रहे बदलावों को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने गंभीर आपत्ति जताई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्यों से बिना सलाह-मशविरा किए ऐसे फैसले लागू कर रही है, जिनका सबसे अधिक असर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत ग्राम जी' किया गया है और इसके साथ लागू किए जा रहे नए प्रावधानों से प्रदेश पर हर साल 164 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

अनिरुद्ध सिंह ने वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब तक मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन नए प्रावधानों के तहत विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए खर्च का अनुपात 90:10 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल को अपनी जेब से बड़ी राशि खर्च करनी पड़ेगी। मंत्री के अनुसार मौजूदा रोजगार स्तर को बनाए रखने के लिए भी राज्य को हर साल अतिरिक्त धन की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई जा रही राशि के आधार पर प्रदेश को केवल 220 से 230 लाख मानव दिवस का रोजगार मिल पाएगा, जबकि राज्य में अब तक 395 लाख मानव दिवस का काम कराया जा चुका है।

मंत्री ने मजदूरी दर में प्रस्तावित बदलाव को भी गरीब मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों को 320 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी मिल रही थी, लेकिन नए प्रावधानों के तहत गैर-जनजातीय क्षेत्रों में यह दर घटकर 247 रुपये रह जाएगी। उनके मुताबिक देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब मजदूरी बढ़ाने के बजाय कम करने की बात की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर मजदूरी में अतिरिक्त राशि जोड़ सकती थी, लेकिन अब इसके लिए भी केंद्र की अनुमति लेनी होगी।

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के लिए रोजगार का बड़ा सहारा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग आधारित योजना को अब सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था में बदला जा रहा है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में योजना के संचालन में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों का करीब 20 करोड़ रुपये का भुगतान भी फरवरी से लंबित है। मंत्री ने कहा कि नए प्रावधान लागू होने के बाद हिमाचल की कुल वित्तीय देनदारी आने वाले समय में 800 से 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने माना कि योजना से बाहर होने का जोखिम होने के कारण राज्य सरकार को इन बदलावों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा