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कंवर का विक्कू से सवाल, कहां गई तलमेहड़ा सड़क की राशि

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कंवर का विक्कू से सवाल, कहां गई तलमेहड़ा सड़क की राशि


ऊना, 25 फ़रवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय वॉलीबॉल फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कुटलैहड़ क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण जो सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं, उनकी स्थिति आज तक नहीं सुधारी गई। वीरेंद्र कंवर के अनुसार आपदा के बाद त्वरित मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य होना चाहिए था, लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते क्षेत्र की जनता को अब भी टूटी और जर्जर सड़कों पर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कुटलैहड़ के कई प्रमुख मार्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि पलाहटा सड़क पीपलू से बड़सर, थानाकला से भाखड़ा, बंगाणा से तलमेहड़ा वाया चपलाह तक की सड़कें बेहद खराब हालत में हैं। उनका आरोप है कि इन सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं, डंगे कमजोर हो चुके हैं और बरसात के समय भूस्खलन का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में कुटलैहड़ की जनता ने सुक्खू सरकार को दो–दो विधायक दिए, लेकिन क्षेत्र में कोई ठोस विकास कार्य नजर नहीं आता। व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाले विधायकों के कार्यकाल में एक भी उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ। वीरेंद्र कंवर ने 2022 में जीते विधायक से सवाल किया कि खड़ोल से तलमेहड़ा सड़क के लिए 3.80 करोड़ रुपये की जो घोषणा की थी,वह राशि आखिर कहां गई और उस पर क्या प्रगति हुई।

उनका कहना है कि यदि घोषणाएं की गई थीं तो उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन भी होना चाहिए था। जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक सुविधाएं चाहिए।

पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल में बंगाणा से सत्तारूखा चपलाह सड़क के निर्माण के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत करवाए गए थे। लेकिन 2022 में चुने गए कांग्रेस विधायक ने उस डीपीआर में बदलाव कर राशि घटाकर चार करोड़ करवा दी। वीरेंद्र कंवर ने आरोप लगाया कि धनराशि में कटौती के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और आज भी यह परियोजना अधर में लटकी है।

उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना जनता के साथ अन्याय है। इससे न केवल परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि क्षेत्र के विकास की गति भी रुक जाती है। कंवर ने नाबार्ड से 90 करोड़ रुपये स्वीकृत करवाकर कुटलैहड़ की पांच सड़कों को एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड) घोषित करवाने का भी दावा किया। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि यदि इन परियोजनाओं को मूल स्वरूप में लागू किया जाता, तो आज क्षेत्र की सड़क व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी होती। उन्होंने आरोप लगाया कि 2022 के विधायक ने सभी सड़कों की डीपीआर में अनावश्यक बदलाव कर क्षेत्र की जनता के साथ धोखा किया।

कुटलैहड़ के बोहरू से अलींडा से नंगल सड़क निर्माण को लेकर भी वीरेंद्र कंवर ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में इस सड़क के निर्माण पर 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन घटिया सामग्री के उपयोग के कारण सड़क चार माह के भीतर ही खराब हो गई। बरसात के दौरान सड़क के डंगे ध्वस्त हो गए और कई स्थानों पर मार्ग अवरुद्ध हो गया। उन्होंने संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करने और सड़क का पुनर्निर्माण कराने की मांग की। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि जब यह सड़क कच्ची थी, तब नंगल से बोहरू तक तीन बसें नियमित चलती थीं। लेकिन सड़क के पक्की होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। अब बसें तो दूर, छोटी गाड़ियों की आवाजाही भी प्रभावित है। कंवर ने कहा कि पहले लोग 15 किलोमीटर की दूरी तय कर नंगल पहुंच जाते थे, लेकिन अब खराब सड़क के कारण उन्हें लगभग 40 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार का निर्माण कार्य विकास नहीं, बल्कि संसाधनों की बर्बादी है। यदि समय रहते मरम्मत और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आने वाले बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल