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हरोली उत्सव में पशु मेला, कांगड़ के देसराज की गाय ने लूटी महफिल

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हरोली उत्सव में पशु मेला, कांगड़ के देसराज की गाय ने लूटी महफिल


ऊना, 12 अप्रैल (हि.स.)। राज्य स्तरीय हरोली उत्सव के दूसरे दिन हरोली मैदान रोड़ा में आयोजित काफ़ रैली मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। देशी गाय प्रतियोगिता में कांगड़ के देसराज की साहीवाल नस्ल की गाय ने प्रथम स्थान हासिल किया। घालूवाल की स्वामी यमुना की साहीवाल नस्ल ने दूसरा तथा हरोली के सुदर्शन की गिर नस्ल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

इसी प्रकार मुर्राह भैंस श्रेणी में सैंसोवाल के रजनीश कुमार की कटड़ी ने प्रथम, बीटन के प्रदीप कुमार की कटड़ी ने दूसरा तथा मलूकपुर के अमनदीप की कटड़ी ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा विदेशी नस्ल श्रेणी में चुरुड़ु के अभिनव मिन्हास की बछड़ी ने प्रथम, पूबोवाल के हेमराज की बछड़ी ने दूसरा तथा पालकवाह के ध्रुव की बछड़ी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। उपमुख्यमंत्री ने विजेता बछड़ों/कटड़ियों और बछियों के मालिकों को गिफ्ट हैम्पर और पशुओं के लिए फीड की बोरी देकर सम्मानित किया । वहीं, काफ़ रैली में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस प्रकार की काफ़ रैली पशुपालकों को तो प्रोत्साहित करती ही है, युवाओं को भी पशुपालन से जुड़ने के लिए प्रेरित करने में मददगार है। उन्होंने रैली के सफल आयोजन के लिए प्रबंधकों को बधाई दी।

काफ़ रैली में क्षेत्रभर से आए पशुपालकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिसमें लगभग 50 दुधारू पशुओं को प्रदर्शित किया गया। प्रतियोगिता के दौरान पशुपालन क्षेत्र से जुड़े लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

रैली के अंतर्गत 0 से 6 माह आयु वर्ग के पशुओं की विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त 5 से 6 दिन आयु वर्ग के बछड़ों की उपस्थिति ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया।

प्रतियोगिता में पशुओं की आयु के आधार पर उनकी वृद्धि (ग्रोथ), शारीरिक बनावट, सुडौलता, दांत तथा साफ-सफाई जैसे मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इसमें पशुओं की तीन प्रमुख श्रेणियों - देशी नस्ल, विदेशी नस्ल तथा कटड़ियों के बीच मुकाबले आयोजित किए गए। देशी नस्ल वर्ग में गिर, साहीवाल तथा लाल सिंधी गायों ने अपनी विशेष पहचान बनाई। वहीं, विदेशी नस्ल वर्ग में होल्स्टीन फ्रिजियन (एचएफ) तथा जर्सी नस्ल के पशु आकर्षण का केंद्र रहे। कटड़ियों के वर्ग में मुर्राह नस्ल ने दर्शकों और विशेषज्ञों का विशेष ध्यान खींचा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल