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चिंतपूर्णी में सीसीटीवी कैमरा में होती है चढ़ावे की गिनती

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चिंतपूर्णी में सीसीटीवी कैमरा में होती है चढ़ावे की गिनती


ऊना, 15 जुलाई (हि.स.)। अयोध्या के श्री राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि उनके द्वारा चढ़ाया गया दान किस तरह सुरक्षित रखा जाता है, उसकी गणना कैसे होती है और पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। इसे लेकर जब पड़ताल की तो पाया कि चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रूप में संचालित की जाती है।

मंदिर प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और चढ़ावे की प्रत्येक राशि का सही लेखा-जोखा सुनिश्चित हो।

मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रोजाना गिनती की जाती है। दान पात्र (गल्ला) को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में खोला जाता है। प्रत्येक दिन प्राप्त चढ़ावे को सुरक्षित तरीके से सीलबंद किया जाता है और अगले दिन मंदिर ट्रस्ट के 8 से 10 अधिकृत सदस्यों की उपस्थिति में सीसीटीवी कैमरों के सामने गल्ला खोला जाता है। रोजाना पुजारियों में से जिसकी बारी होती है केवल वही बारीदार अंदर जा सकता है उसके बिना कोई नही। गिनती स्थल को पूरी तरह शीशे से पारदर्शी बनाया गया है, जिससे श्रद्धालु भी बाहर से पूरी प्रक्रिया को देख सकते हैं। इतना ही नहीं, चढ़ावे की गिनती की लाइव फुटेज मंदिर परिसर में लगी डिस्प्ले स्क्रीन पर भी प्रसारित की जाती है, ताकि हर श्रद्धालु इस प्रक्रिया को स्वयं देख सके।

चढ़ावे की गिनती पूरी होने के बाद बैंक के कर्मचारी प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर राशि प्राप्त करते हैं और उसी दिन उसे बैंक में जमा कर दिया जाता है। इससे नकदी के सुरक्षित प्रबंधन के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है। बैंक में जमा समस्त राशि का ब्यौरा मंदिर न्यास के पास मौजूद रहता है।

मंदिर न्यास के आयुक्त जतिन लाल का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास सर्वोपरि है। इसी उद्देश्य से चढ़ावे के संग्रह, गिनती और बैंक में जमा करने तक की प्रत्येक प्रक्रिया को स्पष्ट, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है। यही कारण है कि मां चिंतपूर्णी मंदिर की दान व्यवस्था श्रद्धालुओं के बीच भरोसे का प्रतीक मानी जाती है।

माता को अर्पित किए जाने वाले सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए मंदिर प्रशासन ने सील्ड स्ट्रांग रूम की व्यवस्था की है। इन बहुमूल्य चढ़ावों को सुरक्षा मानकों के तहत स्ट्रांग रूम में रखा जाता है और निर्धारित अंतराल के बाद सरकारी प्रक्रिया के अनुसार उन्हें ट्रेजरी अम्ब में जमा करा दिया जाता है।

मंदिर न्यास द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले 6 महीनों (जनवरी से जून) में दानपात्र से 18.29 करोड़ रुपये नकद प्राप्त हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल