हिमाचल में कर्ज़ के बोझ तले टैक्सी ऑपरेटर, सरकार से राहत की गुहार
शिमला, 18 जनवरी (हि.स.)। पहाड़ों और पर्यटन के लिए पहचाने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में सैलानियों को मंजिल तक पहुंचाने वाले टैक्सी चालक खुद आजीविका के संकट से जूझ रहे हैं। वाहनों की किस्तें, बढ़ता खर्च और घटता काम हजारों टैक्सी ऑपरेटरों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। इसी को लेकर देवभूमि ऑल हिमाचल टैक्सी-मैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन ने परिवहन विभाग के माध्यम से राज्य सरकार को एक विस्तृत मांगपत्र सौंपा है। संगठन का कहना है कि हालात ऐसे बन गए हैं कि हजारों परिवारों का रोजगार खतरे में पड़ गया है।
एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश में करीब 80 हजार टैक्सी ऑपरेटर कार्यरत हैं और इनमें से बड़ी संख्या ने वाहन खरीदने के लिए बैंक से ऋण लिया हुआ है। मौजूदा स्थिति में लगभग 60 प्रतिशत ऑपरेटर अपनी ईएमआई चुकाने में असमर्थ हो चुके हैं, जिससे कई वाहन डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। संगठन का कहना है कि पर्यटन प्रदेश होने के बावजूद टैक्सी चालकों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मांगपत्र में सरकार से टैक्सी परमिट की वैधता अवधि बढ़ाकर 12 से 15 वर्ष करने की मांग की गई है, ताकि ऑपरेटरों को राहत मिल सके। इसके साथ ही जीपीएस के नाम पर कंपनियों और रिजर्व सर्विस से जुड़े बार-बार के नियमों और खर्चों से निजात दिलाने की अपील की गई है। एसोसिएशन ने निजी लोकल रूट की बसों में हो रही ओवरलोडिंग और अवैध संचालन पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई है। साथ ही निजी और पारिवारिक वाहनों के टैक्सी के रूप में हो रहे अवैध इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।
संगठन ने ओला, उबर, ब्ला-ब्ला और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि निजी गाड़ियों और बाइकों से किया जा रहा टैक्सी संचालन स्थानीय ऑपरेटरों के लिए बड़ा नुकसान बन गया है। एसोसिएशन ने ऐसे अवैध संचालन को तुरंत बंद करने और संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी ऑपरेटरों के लिए ड्यूटी सिस्टम लागू करने, शिमला और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सड़कों के किनारे टूरिस्ट पिक-अप पर रोक लगाने और फर्जी गाइडों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है। बाहरी राज्यों की टैक्सी गाड़ियों को नगर निगम क्षेत्रों में केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों तक सीमित करने की बात कही गई है।
एसोसिएशन ने डीजल, पेट्रोल, स्पेयर पार्ट्स और बीमा की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए टैक्सी किराए में समय-समय पर बढ़ोतरी को जरूरी बताया है। साथ ही सभी जिलों में टैक्सी स्टैंड स्थापित करने और टैक्सी वाहनों के पंजीकरण व टैक्स व्यवस्था में सुधार की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि टैक्सी ऑपरेटर हिमाचल के पर्यटन की रीढ़ हैं और यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर पर्यटन के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

