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मंडी-कुल्लू सीमा पर दुर्लभ मादा बारहसिंगा ने शिकारियों के खौफ से नदी में लगरई छलांग, उपचार के दौरान तोड़ा दम

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मंडी-कुल्लू सीमा पर दुर्लभ मादा बारहसिंगा ने शिकारियों के खौफ से नदी में लगरई छलांग, उपचार के दौरान तोड़ा दम


मंडी, 04 फ़रवरी (हि.स.)। मंडी जिला की सीमा से सटे बालीचौकी और बंजार क्षेत्र के मध्य स्थित तीर्थन घाटी में एक दुर्लभ मादा बारहसिंगा के अवैध शिकार की कोशिश और उसके बाद हुई मौत ने वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। घटना मंगलवार देर शाम की है जब बालीचौकी के चलोगी क्षेत्र में ग्रामीणों ने इस बेजुबान जीव को बदहवास हालत में इधर-उधर भागते देखा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मादा बारहसिंगा शिकारियों के डर से इस कदर भयभीत थी कि उसने अपनी जान बचाने के अंतिम प्रयास में उफनती तीर्थन नदी में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों की सजगता के चलते तुरंत वन विभाग बंजार और पशुपालन विभाग को सूचित किया गया। मानवता का परिचय देते हुए मंगलौर पंचायत में तैनात पशुपालन कर्मचारी भूपेंद्र शर्मा ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बर्फीले पानी वाली नदी में छलांग लगाई और ग्रामीणों की मदद से और वन कर्मियों के सहयोग से घायल जीव को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, रेस्क्यू के बाद जब उसे उपचार के लिए ले जाया गया, तो उसकी हालत नाजुक बनी रही और मंगलवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह मादा बारहसिंगा पिछले करीब दो महीनों से थाची क्षेत्र के आसपास देखी जा रही थी और उसने लगभग दस किलोमीटर का सफर तय कर इस क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाया था। दुखद पहलू यह भी है कि इस मादा के साथ उसके नन्हे शावक (हिरन) भी मौजूद थे, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे वन्यजीव विभाग की चिंता और अधिक बढ़ गई है कि क्या वे सुरक्षित हैं या वे भी शिकारियों का ग्रास बन गए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय स्तर पर मिल रही अपुष्ट जानकारियों के अनुसार बारहसिंगा के शरीर पर चोट लगने के निशान होने की बात कही जा रही है, जो सीधे तौर पर अवैध शिकार की ओर इशारा करते हैं।

वन मंडल बंजार के डीएफओ मनोज कुमार ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव के शरीर पर चोटों के गहरे निशान पाए गए हैं और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मौत का असली कारण क्या था। इस दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव की मौत ने कुल्लू और मंडी जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय शिकारियों के नेटवर्क और वन विभाग की गश्त प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और उन्होंने मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में तीर्थन जैसी संरक्षित घाटियों में वन्यजीवों पर इस तरह का संकट न आए।

फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है जिसके बाद ही पुलिस और वन विभाग इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आगामी जांच को गति देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा