सुकेत साहित्य उत्सव: चार किताबों का विमोचन,वर्तमान में साहित्य की भूमिका पर चर्चा
मंडी, 21 मार्च (हि.स.)। देवता मेला समिति, सुंदरनगर एवं सुकेत साहित्य परिषद के सौजन्य से साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी दर्शन कालिया बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रहे। जबकि जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारी पृथीपाल सिंह, हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के पूर्व सचिव कर्म सिंह और एसपीयू के इतिहास विभाग प्रमुख डा. राकेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस अवसर पर कवि साहित्यकार पृथीपाल सिंह की पुस्तक आषाढ़ का प्रथम दिवस, मशहूर कथाकर राजकुमार राकेश के दो कहानी संग्रह सिगार और पोटैशियम सायनाइड और युवा कवि हितेंद्र शर्मा के काव्य संग्रह अंतर्मन के संवाद का विमोचन किया गया। इस अवसर पर राजकुमार राकेश ने कहा कि हर लेखक अपने बारे में संशय में रहता है। लेखक भी इसी समाज का प्राणी होता है उसे समाज से अलग करके नहीं देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आचलिकता की संवेदना स्थानीय होने के साथ-साथ वैश्विक होती है। क्योंकि मानवीय स्वभाव और जटिलताएं हर जगह एक सी होती है, विश्व साहित्य का अनुवाद करते हुए मुझे जादुई यथार्थ के रचनाकार ग्रेबियल गार्सिया माक्र्वेज़ और जॉन स्टाइन की रचनाओं में मुझे यह अहसास हुआ कि यह हिमाचल के किसी गांव या कस्बे की रचनाएं हैं। वर्तमान साहित्य की भूमिका पर चर्चा के दौरान रेवती सैनी ने कहा कि मेघदूतम् संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध खंडकाव्य है...जिसमें यक्ष की वेदना के बहाने कालिदास का शाश्वत प्रेम संदेश है। यह मानवीय संवेदनाओं, प्रेम की गहनता, प्रकृति से आत्मीय एकत्व की महागाथा है। भाषा, शैली और काव्य सौंदर्य, उपमा, रूपक, प्रतीकात्मकता का समावेश है। जिसमें यक्ष प्रेम का प्रतीक है तो यक्षणी प्रतीक्षा की मूर्त छवि है, जिसके सौंदर्य, स्नेह और विरह की छवि कालिदास ने अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत की है।
वहीं पर राज कुमार राकेश की कहानियों पर चर्चा करते हुए मुरारी शर्मा ने कहा कि राकेश की कहानियों में पहाड़ का आमजनमानस बोलता है, यहां का परिवेश सबसे बढ़कर वंचित व्यक्ति का आक्रोश मुखर होता है। राजुकमार राकेश की कहानियों का नायक मेहनतकश आदमी है जो घन की चोट से व्यवस्था की चट्टान को तोड़ने हिम्मत रखता है। इनकी कहानियों में आंचलिकता से लेकर भूमंडलीकरण तक के मसलों को उठाया गया है।
वहीं पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात कवि गणेश गनी ने कहा कि हितेंद्र शर्मा अंर्तमन से संवाद एक ऐसी यात्रा है जो बाहर की दुनिया के कोलाहल से थककर अपने भीतर की गहराइयों में उतरने का नाम है। जब हम चुप हो जाते हैं, जब मोबाइल बंद कर देते हैं और आंखें मूंद लेते हैं, तक शुरू होता है वह संवाद, जो शब्दों से अधिक मौन में बोलता है।
सुकेत साहित्य परिषद के अध्यक्ष गंगाराम राजी ने कहा कि हर वर्ष देवता मेले के अवसर प्रशासन के सहयोग से साहित्यिक आयोजन करवाया जाता है। इस बार इस आयोजन में मंडी, सुंदरनगर के अलावा बिलासपुर, डलहौजी, शिमला और चंडीगढ़ से आए साहित्यकारों ने शिरकत की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

