मांगों को लेकर सोमवार को हड़ताल पर रहेंगी मिड डे मील वर्कर्स, सचिवालय तक मार्च का ऐलान
शिमला, 21 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की मिड डे मील वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 22 जून यानी सोमवार को पूरे प्रदेश में हड़ताल करने का ऐलान किया है। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू) ने कहा है कि राज्यभर की कार्यकर्ता सोमवार को काम बंद रखेंगी और शिमला में सचिवालय तक मार्च निकालकर सरकार को ज्ञापन सौंपेंगी।
यूनियन के राज्य प्रभारी जगत राम ने बताया कि सभी मिड डे मील वर्कर्स सुबह 11 बजे शिमला में टालैंड के पास एकत्र होंगी। इसके बाद साढ़े 11 बजे टालैंड से सचिवालय तक जुलूस निकाला जाएगा और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
यूनियन का आरोप है कि मिड डे मील वर्कर्स की मांगों को लंबे समय से सरकार के सामने उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं किया गया है। यूनियन ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 17 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में एक रुपये तक की बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनका कहना है कि महिला सशक्तिकरण की बात करने के बावजूद मिड डे मील वर्कर्स की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
यूनियन के अनुसार प्रदेश में हजारों मिड डे मील वर्कर्स सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करने का काम कर रही हैं। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ ने मिड डे मील वर्कर्स को 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन इस फैसले को अब तक लागू नहीं किया गया है।
यूनियन का आरोप है कि मिड डे मील वर्कर्स को पूरे वर्ष कोई निर्धारित छुट्टी नहीं मिलती और कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन का भुगतान भी नहीं होता। इसके अलावा उन्हें वेतन किस्तों में दिया जाता है। यूनियन ने यह भी कहा कि स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम होने पर कार्यकर्ताओं की नौकरी पर खतरा मंडराने लगता है, इसलिए इस शर्त को समाप्त किया जाना चाहिए।
मिड डे मील वर्कर्स का कहना है कि चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन तैयार करने का काम भी उनसे लिया जाता है, लेकिन इसके बदले कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता। यूनियन ने सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा देने की भी मांग की है। साथ ही मेडिकल जांच के लिए होने वाले खर्च का भुगतान शिक्षा विभाग द्वारा किए जाने की मांग भी उठाई गई है।
यूनियन ने मांग की है कि हरियाणा की तर्ज पर मिड डे मील वर्कर्स को 7,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह वार्षिक छुट्टियां दी जाएं, पहली तारीख को पूरा वेतन एकमुश्त जारी किया जाए और मिड डे मील योजना का दायरा प्लस-टू स्तर तक बढ़ाया जाए। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को नियमित करने के लिए नीति बनाने की मांग भी की गई है।
यूनियन का कहना है कि इन सभी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

