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मंडी नगर के 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर एसपीयू में संगोष्ठी आयोजित

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मंडी नगर के 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर एसपीयू में संगोष्ठी आयोजित


मंडी नगर के 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर एसपीयू में संगोष्ठी आयोजित


मंडी, 17 अक्टूबर (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के इतिहास विभाग एवं भारतीय सांस्कृतिक निधि इंटैक मंडी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मंडी नगर के 500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर मंडी नगर के 500 वर्ष का इतिहास: स्थापत्य विरासत एवं लोकगीत परंपरा का अध्ययन विषय पर इतिहास संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के अमृत महोत्सव सभागार में किया गया। जिसमें मंडी नगर की ऐतिहासिक विकास यात्रा, स्थापत्य कला, लोकगीतों में संरक्षित ऐतिहासिक स्मृतियों तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति, आचार्य (डॉ.)ललित कुमार अवस्थी ने की। जबकि उपायुक्त अपूर्व देवगन मुख्य अतिथि तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण आचार्य राजेश कुमार शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे।

इतिहास विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ.राकेश कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों और विश्वविद्यालय की विरासत संरक्षण संबंधी पहलों पर प्रकाश डाला। इंटैक मंडी चैप्टर के संयोजक नरेश मल्होत्रा ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मंडी नगर की ऐतिहासिक यात्रा, स्थापत्य विशेषताओं और सांस्कृतिक परम्पराओं के व्यवस्थित अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण तथा उनके महत्त्व को समाज तक पहुंचाने में इंटैक और विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की भूमिका को महत्त्वपूर्ण बताया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने मंडी नगर की पांच शताब्दियों की ऐतिहासिक यात्रा को हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्त्वपूर्ण अध्याय बताया व कहा कि मंडी की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने मंडी के 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित विशेष लोगो तैयार किया है।

वहीं मुख्य अतिथि उपायुक्त अपूर्व देवगन ने मंडी नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टता के महत्त्व को रेखांकित करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों को ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा