शहीदी दिवस: एसपीयू में अमर बलिदानी- इतिहास के प्रेरणास्रोत विषय पर कार्यक्रम का आयोजन
मंडी, 23 मार्च (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी में शहीदी दिवस के अवसर पर एक प्रभावशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मांडव्य छात्र अध्ययन मंडल द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें इतिहास विभाग एवं भौतिकी विभाग का सहयोग रहा। कार्यक्रम का विषय था अमर बलिदानी: इतिहास के प्रेरणास्रोत। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अमृत महोत्सव सभागार, स्वामी विवेकानंद भवन में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने भाग लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण तथा नगर के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। साथ ही मांडव्य छात्र अध्ययन मंडल के अध्यक्ष अमन भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति ललित कुमार अवस्थी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव शशि पाल नेगी ने की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में वीर सिंह रांगड़ा भौतिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता वीर सिंह रांगड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि शहीदी दिवस केवल एक स्मरण का दिन नहीं, बल्कि प्रेरणा लेने का अवसर है। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के जीवन और बलिदान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों ने बहुत कम उम्र में ही यह समझ लिया था कि देश की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। मात्र 23-24 वर्ष की आयु में उन्होंने हंसते-हंसते फांसी को स्वीकार किया।
उन्होंने आगे कहा कि भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक गहरे विचारक भी थे। उनका मानना था कि असली क्रांति विचारों से आती है। उन्होंने समाज में असमानता, गरीबी और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और हमें यह सिखाया कि एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देशभक्ति को केवल शब्दों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने कार्यों में उसे प्रदर्शित करें।
मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्य वक्ता ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के विचारों और गुणों को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन क्रांतिकारियों का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना था और उन्होंने बिना शोर मचाए एक स्पष्ट मिशन के साथ कार्य किया। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम भी अपने विचारों और संदेश को सही रणनीति के साथ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में बदलाव लाना है, तो हमें अपनी बात को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना होगा, ताकि अधिक से अधिक लोग उससे जुड़ सकें।
उन्होंने राजगुरु के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें अपनी क्षमताओं और गुणों का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए। कुलपति ललित कुमार अवस्थी ने भगत सिंह के अंतिम पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सर्वोच्च बलिदान अपना बलिदान को अपने देश के प्रति अपनी इच्छाओं का एक छोटा सा हिस्सा ही माना। उ
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

