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यूएन में गूंजी भारत की आवाज, सिकंदर कुमार ने रखा आत्मनिर्भर विकास का मॉडल

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यूएन में गूंजी भारत की आवाज, सिकंदर कुमार ने रखा आत्मनिर्भर विकास का मॉडल


शिमला, 07 अक्टूबर (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के विकास मॉडल और वैश्विक दक्षिण के साथ उसकी साझेदारी की बात पहुंची। हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित उच्चस्तरीय परिचर्चा में भारत के शहरी विकास, जनकल्याण और समावेशी विकास की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकास की असली सफलता उसके आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले असर से तय होती है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में न्यू अर्बन एजेंडा, अल्प विकसित देशों (एलडीसी) और भू-आबद्ध विकासशील देशों (एलएलडीसी) से जुड़े मुद्दों पर आयोजित परिचर्चा में प्रो. सिकंदर कुमार ने भारत की विकास यात्रा को सामने रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, समानता और शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि विकास के प्रयासों में आम लोगों की जरूरतों और देशों की अपनी प्राथमिकताओं को महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने भारत की कई प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत, स्वच्छ भारत मिशन और पीएम स्वनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और पारदर्शी शासन के इस्तेमाल से इन योजनाओं ने शहरी आवास, जीवन स्तर और आजीविका के क्षेत्र में बदलाव लाने में मदद की है।

सिकंदर कुमार ने अल्प विकसित और भू-आबद्ध विकासशील देशों के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने जलवायु संकट, तकनीक तक असमान पहुंच और बढ़ते कर्ज के बोझ पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन देशों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है और भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से ऐसे देशों के साथ साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत ने 68 साझेदार देशों को 32 अरब डॉलर से अधिक की लाइन ऑफ क्रेडिट दी है। इसके अलावा हर वर्ष 13 हजार से अधिक पूर्ण वित्तपोषित आईटीईसी प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने 150 मिलियन डॉलर के इंडिया-यूएन विकास कोष का भी उल्लेख किया।

सिकंदर कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाली घोषणाओं की वास्तविक सफलता कागज पर किए गए वादों से नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाले ठोस और मापने योग्य बदलावों से तय होनी चाहिए। उन्होंने विकास के लिए देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करने और जरूरत के अनुसार सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा