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परीक्षा में अंक ही नहीं, चरित्र भी जरूरी : शांता कुमार

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परीक्षा में अंक ही नहीं, चरित्र भी जरूरी : शांता कुमार


शिमला, 11 मई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मेरिट में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी हैं।

उन्होंने कहा कि आज सभी समाचार पत्र शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणामों और मेधावी छात्रों की मुस्कराती तस्वीरों से भरे पड़े हैं, जिन्हें देखकर अत्यंत खुशी हुई।

उन्होंने कहा कि मेरिट में आने वाले अधिकांश छात्र डॉक्टर, इंजीनियर और अध्यापक बनने की इच्छा जता रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जीवन में जो भी बनना चाहें, अवश्य बनें, लेकिन सबसे पहले एक अच्छा और ईमानदार इंसान बनें।

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही जीवन की सफलता का मापदंड नहीं है, बल्कि व्यक्ति का चरित्र सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2000 में पूजा सिंघल ने मात्र 21 वर्ष की आयु में पूरे देश में आईएएस परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उनकी इस उपलब्धि की देशभर में चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में झारखंड में खनिज विकास निगम में प्रबंध निदेशक रहते हुए वे भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में फंस गईं और वर्ष 2022 में जेल भी जाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि पूजा सिंघल अत्यंत योग्य अधिकारी तो बनीं, लेकिन एक अच्छी इंसान नहीं बन सकीं। इसी कारण इतनी बड़ी सफलता प्राप्त करने के बावजूद उन्हें जेल तक जाना पड़ा।

उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में सफलता के साथ-साथ ईमानदारी, नैतिकता और अच्छे चरित्र को भी सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला