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फीस बढ़ोतरी और नई समय-सारणी के विरोध में एसएफआई का हिमाचल विवि में प्रदर्शन

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फीस बढ़ोतरी और नई समय-सारणी के विरोध में एसएफआई का हिमाचल विवि में प्रदर्शन


शिमला, 10 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी, नई समय-सारणी और छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को लॉ फैकल्टी में छात्रों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के नेतृत्व में हुआ। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि वापस लेने, नई समय-सारणी में बदलाव करने और छात्र संघ चुनाव फिर से कराने की मांग की।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एसएफआई के रोहित ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अलग-अलग मदों में लगातार फीस बढ़ाई जा रही है। उनके अनुसार अकादमिक फीस के साथ परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, बस किराया और थीसिस जमा करने की फीस सहित कई अन्य शुल्क बढ़ाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एक सार्वजनिक शिक्षण संस्थान है और यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षा सस्ती और आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फीस में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।

एसएफआई के पोविंदर ने विश्वविद्यालय में लागू नई समय-सारणी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार कक्षाएं और व्यस्त समय-सारणी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। खासकर कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को कक्षाओं के अलावा अदालती फैसलों से जुड़े अध्ययन, किताबें, असाइनमेंट और दूसरी अध्ययन सामग्री पढ़ने के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होती है।

उनका कहना था कि नई समय-सारणी के कारण विद्यार्थियों को स्व-अध्ययन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय-सारणी पर दोबारा विचार करने की मांग की।

प्रदर्शन में छात्र संघ चुनाव बहाल करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और अपने प्रतिनिधि चुनने का लोकतांत्रिक माध्यम देते हैं। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी होनी चाहिए और छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल किए जाने चाहिए।

एसएफआई ने आरोप लगाया कि चुनाव बहाल नहीं होने से विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं।

एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने मांग की कि फीस में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए, विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार नई समय-सारणी में बदलाव किया जाए और छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल किए जाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा