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एचपीयू में फीस बढ़ोतरी छात्र विरोधी, फैसला तुरंत वापस ले विवि प्रशासन : एसएफआई

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एचपीयू में फीस बढ़ोतरी छात्र विरोधी, फैसला तुरंत वापस ले विवि प्रशासन : एसएफआई


शिमला, 11 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में हाल ही में हुई फीस बढ़ोतरी को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कड़ा विरोध जताया है। शिमला में शनिवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता में संगठन के राज्य सचिव सन्नी सिकटा ने विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला छात्रों के हितों के खिलाफ है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

एसएफआई के मुताबिक विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने 28 मार्च को रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी के प्रस्ताव पर विभिन्न कोर्सों की फीस में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके साथ ही परीक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत और हॉस्टल फीस में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। संगठन का कहना है कि पीएचडी कार्यक्रम के तहत थीसिस जमा करने और मूल्यांकन की फीस में भी 50 प्रतिशत तथा थीसिस जमा करने की अवधि बढ़ाने की फीस में 33 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है।

एसएफआई ने यह भी कहा कि एमबीए, एमसीए, एमटेक, एमएससी और अन्य तकनीकी व प्रोफेशनल कोर्सों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करने की फीस में 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है, जो छात्रों के लिए चिंताजनक है। संगठन का आरोप है कि सरकार “रिसोर्स क्रंच” का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है और सरकारी शिक्षण संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।

सन्नी सिकटा ने कहा कि प्रदेश बजट 2026–27 में एचपीयू के लिए 142 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 152 करोड़ रुपये थी। उनका कहना है कि अनुदान में कमी के कारण विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है और इसका बोझ छात्रों पर डाला जा रहा है।

एसएफआई का यह भी कहना है कि राज्य में पहले ही कई सरकारी शिक्षण संस्थानों को बंद या मर्ज किया जा चुका है और निजी संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों में फीस बढ़ोतरी से सार्वजनिक शिक्षा की पहुंच और सीमित हो सकती है।

संगठन ने फीस बढ़ोतरी का फैसला तुरंत वापस लेने, विश्वविद्यालय को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। साथ ही एसएफआई ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा