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भारत की पहचान केवल मानचित्र पर खिंची सीमाओं में नहीं बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना में निहित : प्रो. अग्निहोत्री

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भारत की पहचान केवल मानचित्र पर खिंची सीमाओं में नहीं बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना में निहित : प्रो. अग्निहोत्री


भारत की पहचान केवल मानचित्र पर खिंची सीमाओं में नहीं बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना में निहित : प्रो. अग्निहोत्री


धर्मशाला, 26 अगस्त (हि.स.)। अगस्त क्रांति और स्वतंत्रता की स्मृतियों से जुड़े अगस्त माह में ‘अखंड भारत दिवस’ अथवा ‘विशाल भारत दिवस’ के उपलक्ष्य में बुधवार को श्री सत्य साईं एजुकेयर विद्या प्रतिष्ठान, धर्मशाला में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 'विशाल भारत' विषयक यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा देशभर में आयोजित किए जा रहे 25 कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा था। संगोष्ठी में ‘विशाल भारत’ की अवधारणा को केवल भौगोलिक सीमाओं से परे एक सांस्कृतिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टि के रूप में विचारित किया गया।

संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) कुलदीप चंद अग्निहोत्री, पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश एवं वर्तमान उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य अकादमी ने कहा कि भारत की पहचान केवल मानचित्र पर खिंची सीमाओं में नहीं, बल्कि उसकी चिरंतन सांस्कृतिक चेतना में निहित है। उन्होंने ‘अखंड भारत’ की अवधारणा, भारत विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा वर्तमान संदर्भ में उससे जुड़े भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाजित भूभागों से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को जीवित रखना तथा ऐतिहासिक तीर्थस्थलों और विरासत से जुड़ाव बनाए रखना इस विमर्श का एक महत्वपूर्ण पक्ष हो सकता है।

वहीं मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी राय, पूर्व राष्ट्रीय संगठन सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने कहा कि ‘विशाल भारत एक दार्शनिक सिद्धांत है, जो किसी निश्चित भौगोलिक सीमा से बंधा हुआ नहीं है।’ उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों को विशाल भारत की व्यापक अवधारणा से जोड़ते हुए इन पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) ओ.एस.के. सुब्रमणियन शास्त्री, वरिष्ठ प्रोफेसर, भौतिकी, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश ने की। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा तथा विश्वभर में भारतीय संस्कृति की उपस्थिति को रेखांकित किया।

स्वतंत्रता सेनानी शहीद वजीर राम सिंह पठानिया की स्मृति में पौधारोपण

इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी शहीद वजीर राम सिंह पठानिया की स्मृति में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रो. (डॉ.) दीपक पंत ने मातृभूमि की रक्षा के लिए भारतीय वीरों के त्याग और बलिदान को स्मरण किया। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठन सचिव विक्रमादित्य सिंह ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण का आह्वान किया।

इतिहासकार ठाकुर राम सिंह की स्मृति में पोस्टर प्रदर्शनी

इतिहासकार ठाकुर राम सिंह की स्मृति में आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. बी.सी. चौहान, अध्यक्ष, ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान, ने किया। उन्होंने भारतीय दृष्टि से इतिहास लेखन और शोध के महत्व पर प्रकाश डाला।

समापन सत्र में अम्बरीश, निदेशक, श्री सत्य साईं एजुकेयर विद्या प्रतिष्ठान, ने ‘विशाल भारत’ के विभिन्न आयामों पर विचार रखे। डॉ. छवि कश्यप, शिक्षाविद् एवं प्रधानाचार्य, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल ने ‘खुशहाल भारत’ के लिए व्यापक पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रवीण शर्मा, सचिव, फैंस धर्मशाला चैप्टर ने किया। वहीं डॉ. गौरीशंकर साहू, राष्ट्रीय सचिव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया