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नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करें शोधार्थी :आचार्य ललित कुमार अवस्थी

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नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करें शोधार्थी :आचार्य ललित कुमार अवस्थी


मंडी, 30 अप्रैल (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में इतिहास में अनुसंधान पद्धति विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित

सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के इतिहास विभाग द्वारा इतिहास में अनुसंधान पद्धति: उद्देश्य और चुनौतियां विषय पर एक महत्वपूर्ण अतिथि व्याख्यान का सफल आयोजन इतिहास विभाग में किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य (डॉ.) ललित कुमार अवस्थी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में शोध की गुणवत्ता, नवाचार और अंतर्विषयक दृष्टिकोण पर बल देते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता, मौलिकता और समर्पण के साथ अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान एक निरंतर, धैर्यपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें जिज्ञासा और अनुशासन आवश्यक हैं तथा सफल शोधार्थी वही है जो प्रश्न पूछने और उनके उत्तर खोजने का सतत प्रयास करता है। उन्होंने शोध में नैतिकता के महत्व पर बल देते हुए मौलिकता, पारदर्शिता और ईमानदारी को आवश्यक बताया तथा साहित्यिक चोरी से बचने और स्रोतों का उचित संदर्भ देने को प्रत्येक शोधार्थी का दायित्व बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. राज कुमार समन्वयक, इतिहास विभाग, क्षेत्रीय केंद्र खनियारा, धर्मशाला ने आभासी माध्यम से अपने व्याख्यान में इतिहास में अनुसंधान पद्धति के विभिन्न आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने स्रोत-सामग्री के चयन, प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के महत्व, तथ्यात्मक विश्लेषण, व्याख्या की विधियों तथा शोध लेखन की तकनीकों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इतिहास लेखन में निष्पक्षता, आलोचनात्मक दृष्टि और प्रमाणिकता का विशेष महत्व है।

उन्होंने शोधार्थियों को फील्ड वर्क, अभिलेखागारों के उपयोग तथा डिजिटल संसाधनों के समुचित प्रयोग के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा सह-अधिष्ठाता, अकादमिक मामले एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के शोध कौशल को विकसित करने, इतिहास में अनुसंधान की गहराई, गंभीरता और व्यापकता को समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया, जिसमें शोध से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, विषय चयन, संदर्भ लेखन एवं शोध प्रबंध की संरचना जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा