मंडी के 500 साल पूरे होने पर सरदार पटेल विश्वविद्यालय प्रकाशित करेगा पुस्तक
मंडी, 28 फ़रवरी (हि.स.)। मंडी शहर अपनी स्थापना के 500 साल पूरे कर रहा है। इसे लेकर सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी ने मंडी के इतिहास व शोध के आधार पर पुस्तक प्रकाशित करने का निर्णय लिया है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दस्तावेज उपलब्ध हो सके। विश्वविद्यालय के उपकुलपति आचार्य डॉ ललित कुमार अवस्थी ने विश्वविद्यालय परिसर के अमृत महोत्सव सभागार स्वामी विवेेकानंद भवन में शनिवार को पांच दिवसीय टांकरी लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में यह ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय यह प्रकाशन मंडी के साहित्यकारों, पुरातत्वविदों, इतिहासकारों, लेखकों व बुद्धिजीवियों की मदद से करेगा और इसमें उनके शोधार्थी व इतिहास के विद्यार्थी भी काम करेंगे। इस कार्यशाला में इतिहास विभाग के 93 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा की टांकरी लिपि प्रशिक्षण सत्र केवल एक कार्यशाला का अंत नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा को सहेजने की भावना से होती है। उन्होंने बताया कि टांकरी लिपि हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी हिमालय की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर है। पुराने राजकीय दस्तावेज, भूमि अभिलेख और मंदिरों के लेख इसी लिपि में सुरक्षित हैं। टांकरी सीखना अपने इतिहास और पहचान समझने का माध्यम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. चेत राम गर्ग, निदेशक ठाकुर रामसिंह शोध संस्थान, नेरी हमीरपुर) ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. यज्ञदत्त शर्मा, सहायक आचार्य, संस्कृत विश्वविद्यालय बलाहार, जिला कांगड़ा उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने अपने उद्बोधन में टांकरी लिपि के ऐतिहासिक महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान सम्मान, पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरण भी किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

