समर्पण और नियमों की समझ ही सफलता की कुंजी: आचार्य ललित कुमार अवस्थी
मंडी, 17 अप्रैल (हि.स.)। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति
आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुलसचिव शशि पाल नेगी, वित्त अधिकारी हंस राज सैनी तथा सभी अधिष्ठाता भी विशेष रूप से शामिल हुए। कार्यशाला की शुरुआत उप कुलसचिव डॉ. योगेश शर्मा ने की। इसके बाद कुलसचिव, वित्त अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए नव-नियुक्त कर्मचारियों का मार्गदर्शन किया।
कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में कर्मचारियों को अनुशासन, समर्पण और निरंतर सीखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तेजी से प्रगति कर रहा है और नए कर्मचारियों के जुड़ने से कार्यक्षमता और परिणामों में स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। पहले जहां सीमित नॉन-टीचिंग स्टाफ कार्यरत था, वहीं अब कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की अपेक्षा है। उन्होंने कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया को पार करना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए अपने वर्तमान पद पर उत्कृष्ट प्रदर्शन आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट
किया कि बिना समयपालन, समर्पण और मेहनत के न तो व्यक्तिगत लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं और न ही संस्था के उद्देश्यों को हासिल किया जा सकता है। कुलपति ने कर्मचारियों को फंडामेंटल रूल्स, सप्लिमेंटरी रूल्स और जीएफआर का गहन अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सभी प्रशासनिक और वित्तीय कार्य इन नियमों के
आधार पर ही होने चाहिए और फाइलों की नोटिंग में संबंधित नियमों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए, ताकि निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बन सके।
उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारियों को विभिन्न विभागों की जानकारी रखना जरूरी है, क्योंकि समय-समय पर विभागीय स्थानांतरण संभव है। साथ ही, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने और उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
अपने संबोधन में कुलपति ने विश्वविद्यालय की रैंकिंग सुधार के प्रमुख मानकों-जैसे छात्र संख्या, शिक्षक-छात्र अनुपात, अनुसंधान, वित्तीय प्रबंधन और छात्र उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कार्य और सकारात्मक सोच से ही विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

