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आरटीआई का असर: 165 दिनों बाद जागा प्रशासन गरीब दिव्यांग दलित की जमीन पर कब्जे के मामले में जांच शुरू

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आरटीआई का असर: 165 दिनों बाद जागा प्रशासन गरीब दिव्यांग दलित की जमीन पर कब्जे के मामले में जांच शुरू


मंडी, 01 जुलाई (हि.स.)। प्रशासन की सुस्ती और रसूखदारों के दबाव के आगे बेबस एक गरीब दिव्यांग दलित की चीख आखिरकार 165 दिनों बाद सूचना का अधिकार कानून के डंडे से प्रशासनिक गलियारों तक पहुंची। मंडी जिला के उप-मंडल बालीचौकी के तहत आने वाले जीतराम की शिकायत पर आखिरकार राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।

पीड़ित जीतराम जो अनुसूचित जाति से संबंधित है ने 19 जनवरी 2026 को उप-मंडल अधिकारी नागरिक बालीचौकी को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी भूमि की निशानदेही करने और अवैध अतिक्रमण को रोकने की गुहार लगाई थी। शिकायत के मुताबिक सात वर्ष पूर्व का सौदा उच्च जाति के एक प्रभावशाली व्यक्ति विजयपाल ने जीतराम से पांच बिस्वा जमीन खरीदी थी। अवैध कब्जा और रातों-रात निर्माण का आरोप है कि विजयपाल ने खरीदी गई पांच बिस्वा जमीन से कई गुना अधिक भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया और जेसीबी से उसे समतल कर दिया। रसूखदार व्यक्ति ने रातों-रात वहां सड़क का निर्माण कर दिया और लोक निर्माण विभाग के माध्यम से सरकारी डंगे रिटेनिंग वॉल भी लगवा दिए। जीतराम ने अपनी अर्जी में साफ तौर पर निशानदेही करने और इस अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी।

उसके बार-बार सरकारी दफ्तरों की चौखट पर माथा टेकने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित जीतराम ने आरटीआई एक्टिविस्ट संतराम से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संतराम ने 23 जून 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एसडीएम कार्यालय से इस मामले में हुई अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांग लिया। आरटीआई के जरिए पता चला कि जीतराम के आवेदन को प्रशासन ने 11 फरवरी 2026 को ही तहसीलदार बालीचौकी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया था, लेकिन फाइल धूल फांक रही थी।

आरटीआई लगते ही हरकत में आए प्रशासन ने 30 जून को शाम 4:00 बजे राजस्व विभाग के कानूनगो, पटवारी, लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता और वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड को मौके पर भेजा। इस दौरान मुशतिरख खाताधारक जीतराम, वालेराम, आत्माराम के साथ-साथ सतीश शर्मा, संतराम और दुले सिंह भी उपस्थित रहे।

आरटीआई कार्यकर्ता संतराम ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। एक गरीब, दिव्यांग और दलित परिवार को सत्ता और रसूख के दम पर बर्बाद किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब मौके पर जांच करने गई टीम को भी आरोपी विजयपाल ने फोन पर 10-15 मिनट लंबी बात करके प्रभावित और दबाव में लेने की कोशिश की। संतराम ने कहा है कि इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। वे जल्द ही इस पूरे मामले को लेकर माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बावजूद पीड़ित को न्याय नहीं मिला, तो वे माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा