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शिमला : आरएसएस स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से सामाजिक समरसता का दिया संदेश

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शिमला : आरएसएस स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से सामाजिक समरसता का दिया संदेश


शिमला, 25 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 101वें वर्ष और विजयदशमी के अवसर पर रविवार को शिमला के नया शिमला नगर में पथ संचलन और नगर एकत्रीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवकों ने पारंपरिक गणवेश में भाग लिया। घोष वादन और शस्त्र पूजन के बाद स्वयंसेवकों ने सेक्टर-3 से तारा माता मंदिर तक अनुशासित तरीके से पथ संचलन किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ छोटे बच्चे भी शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विभाग सह कार्यवाह बलवंत सदरेट ने सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में जाति, वर्ग और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे, सहयोग और सद्भाव की भावना मजबूत करना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

बलवंत सदरेट ने सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता और सामूहिक प्रयासों से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सत्येंद्र सिंह मिन्हास ने विजयदशमी के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि विजयदशमी असत्य पर सत्य की जीत, अहंकार पर विनय की जीत और शक्ति की आराधना का पर्व है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन ही डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। कार्यक्रम में नया शिमला नगर के संघचालक महेंद्र काल्टा भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा