हिमाचल में बाढ़ और कटाव रोकने के लिए 875.27 करोड़ जारी : केंद्र सरकार
शिमला, 11 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और नदी कटाव से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) के तहत 875.27 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की है। जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी राज्यसभा में सांसद सिकंदर कुमार द्वारा पूछे सवाल के जवाब में दी। मंत्रालय के अनुसार बाढ़ प्रबंधन, मिट्टी के कटाव को रोकने और पेयजल योजनाओं से जुड़े काम राज्य सरकारें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार तैयार और लागू करती हैं। केंद्र सरकार इन कामों में तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता देती है।
सिकंदर कुमार के सवाल के जवाब में जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, मिट्टी के कटाव को रोकने और जल निकासी के विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए एफएमबीएपी योजना लागू कर रही है। इसके बाढ़ प्रबंधन घटक के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को अब तक कुल 875.27 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है।
मंत्रालय के जवाब में ब्यास, रावी और सतलुज नदी घाटियों के संरचनात्मक तटीकरण के लिए किसी अलग विशेष वित्तीय पैकेज की मंजूरी का उल्लेख नहीं किया गया है। जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि बाढ़ प्रबंधन और कटाव रोधी योजनाओं को राज्य सरकारें अपनी जरूरत और प्राथमिकताओं के अनुसार तैयार करती हैं। केंद्र इन योजनाओं के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत सहायता उपलब्ध कराता है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में नदियों के किनारे कटाव और बाढ़ का खतरा मानसून के दौरान बढ़ जाता है। तेज बारिश, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ से नदी-नालों का बहाव बढ़ने पर किनारे की जमीन और वहां मौजूद ढांचों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में बाढ़ नियंत्रण और कटाव रोकने के काम राज्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पिछले दो वर्षों के दौरान बादल फटने और मानसून की बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई पेयजल योजनाओं को लेकर भी केंद्र ने सहायता की व्यवस्था स्पष्ट की है। मंत्रालय के अनुसार प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण और सुधारीकरण सहित राहत और पुनरुद्धार के काम राज्य सरकारें अपने पास उपलब्ध राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से करती हैं।
इन कामों के लिए भारत सरकार की ओर से निर्धारित मदों और मानकों का पालन किया जाता है। गंभीर प्रकृति की आपदा होने पर राज्य को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी मिल सकती है। इसके लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसिटी) नुकसान का आकलन करती है। आकलन के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार एनडीआरएफ से अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

