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राज्यसभा चुनाव : क्रॉस वोटिंग के डर से हरियाणा के कांग्रेस विधायक लाये गए शिमला, सियासी हलचल तेज

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शिमला, 13 मार्च (हि.स.)। हरियाणा में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और इस बीच कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें हिमाचल प्रदेश के शिमला ले आई है। शुक्रवार को दिन भर हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं और शाम के समय वाहनों के काफिले में कांग्रेस विधायक सोलन होते हुए शिमला पहुंचे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन विधायकों को शिमला या उसके आसपास किस स्थान पर ठहराया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें कुफरी या आसपास के किसी होटल में ठहराया जा सकता है, जहां आम लोगों की आवाजाही कम हो।

हरियाणा में 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान होना है। इन सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण चुनाव का गणित दिलचस्प हो गया है। राज्यसभा चुनाव में जीत का फैसला पूरी तरह विधायकों के वोटों पर निर्भर करता है और इसी कारण दोनों प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हालात में क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए कांग्रेस अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने की रणनीति अपना रही है।

जानकारी के अनुसार हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायक और कुछ सांसद शिमला पहुंचे हैं। कांग्रेस के कुछ विधायक स्वास्थ्य व अन्य कारणों से नहीं आ पाए हैं।

दरअसल हरियाणा विधानसभा में राज्यसभा चुनाव का गणित काफी दिलचस्प माना जा रहा है। भाजपा को दोनों सीटें जीतने के लिए 62 विधायकों के वोट की जरूरत है, जबकि उसके पास फिलहाल 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी बताया जा रहा है। ऐसे में एक सीट जीतने के बाद भाजपा के पास करीब 20 वोट बचते हैं, जबकि दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भाजपा विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है।

इसी संभावना को देखते हुए कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। पार्टी को आशंका है कि अगर उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते हैं तो राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकता है। इसलिए पार्टी ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए शिमला लाने की रणनीति पर काम किया है। राजनीति में इसे अक्सर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” कहा जाता है, जिसमें दल अपने विधायकों को एक साथ किसी सुरक्षित स्थान पर रखकर राजनीतिक संपर्क या दबाव की संभावनाओं को कम करने की कोशिश करते हैं।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के कारण शिमला को सुरक्षित जगह माना जा रहा है। यहां पार्टी को उम्मीद है कि उसके विधायक एकजुट रहेंगे और किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से दूर रहेंगे। बताया जा रहा है कि मतदान तक विधायकों को यहीं रखा जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि हिमाचल प्रदेश में भी करीब दो साल पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान ऐसा ही सियासी घटनाक्रम देखने को मिला था। उस समय कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी, जबकि तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। इसके कारण बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस राज्यसभा की सीट हार गई थी। उस घटना के बाद कांग्रेस के छह बागी विधायक और तीन निर्दलीय विधायक पहले हरियाणा के पंचकूला और बाद में उत्तराखंड में ठहराए गए थे। उस समय इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार थी। अब हरियाणा के राज्यसभा चुनाव को लेकर भी इसी तरह की सियासी रणनीति सामने आ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा