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रंगमंच: आदमी के स्वार्थीपन और महिला सशक्तिकरण के बीच ...कोहरे से लड़ती धूप

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रंगमंच: आदमी के स्वार्थीपन और महिला सशक्तिकरण के बीच ...कोहरे से लड़ती धूप


मंडी, 09 मार्च (हि.स.)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एसवीएम स्कूल महाजन बाजार प्रेक्षागृह में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार रेखा वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जबकि वरिष्ठ साहित्यकार उपन्यासकार गंगाराम राजी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। यह आयोजन भाषा संस्कृति विभाग मंडी के सहयोग से, उत्सव- यूनाइटेड थिएटर सोसाइटी एंड आर्ट विलेज संस्था एवं बागर त्रैमासिक पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर कथाकार अर्पणा धीमान द्वारा लिखित कहानी कोहरे से लड़ती धूप का नाटय मंचन उत्सव- यूनाइटेड थिएटर सोसाइटी एंड आर्ट विलेज संस्था के कलाकारों द्वारा किया गया। जिसका निर्देशन नाट्य निर्देशक दक्षा उपाध्याय द्वारा किया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंचित इस कहानी के बारे में अर्पणा धीमान ने कहा कि यह कहानी नारी व्यथा कि नहीं बल्कि उसके अधिकारों को बयां करती। कहानी के नायिका गोमती अपने अधिकारों के प्रति जागरुक है, परिवार के प्रति अपना दायित्व निभाने के साथ-साथ निजी अधिकारों का भी लाभ उठाती है। नौकरियां सबके पास कहां है, पढ़े-लिखे लोग भी मेहनत करके गुजर बसर कर रहे हैं।

गोमती पशुपालन से अपने परिवार की अर्थव्यवस्था को संभालने का पूरा प्रयास करती है। वहीं सरकार की ओर से दी जाने वाली आईआरडीपी की योजना का लाभ उठाती है। परिवार का पेट भरने के लिए सस्ता राशन लेती है, घर बनाती है, अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए संघर्षरत है तथा अपनी बेटियों को जीवन में कुछ बनने के लिए प्रेरित करती है। अनचाहा गर्भ न ठहर जाए इसलिए भी आप पूरी तरह अपनी सुरक्षा करती है, गोमती ने बेटियों को इतना सशक्त कर दिया है कि मैं अपने पिता और अपनी दादी का विरोध करके आगे बढ़ाने योग्य हो जाती है।

गोमती जीवन के प्रति संघर्षरत है व्यथित नहीं। हमारे समाज की मानसिकता भी क्या है गाय से बछड़ा नहीं चाहिए और महिला की कोख से बेटी जन्म न ले। मनुष्य धरती पर सबसे स्वार्थी जीव है, गाय जैसे निरीह पशु का दोहन करता है और उसे उससे मारपीट करता है। किसी भी मादा जीव के स्तन से बहने वाली दूध की धारा पर केवल उसकी संतान का अधिकार होता है, गाय के बछड़ा हो तो उसे मार दिया जाता है या दूर दराज क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है चरने के लिए। नाटक में पति की भूमिका में वेद कुमार, गोमती की भूमिका में दक्षा शर्मा, सास की भूमिका में सरिता हांडा, मुन्नी के रोल में हर्षिता, गुड्डी के रोल में वंशिका ,सूत्रधार राज चौहान, मंच सज्जा सरिता हांडा ने की।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा