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गणेश पूजा के साथ कोटली में रामलीला उत्सव का आगाज

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गणेश पूजा के साथ कोटली में रामलीला उत्सव का आगाज


गणेश पूजा के साथ कोटली में रामलीला उत्सव का आगाज


मंडी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रों के उपलक्ष में कोटली में आयोजित किया जा रहे रामलीला उत्सव का आगाज गणेश जी की आरती के साथ किया गया। सामुदायिक किसान भवन कोटली में रामलीला कमेटी की ओर से मनाए जा रहे इस 10 दिवसीय रामलीला नाटक मंचन का उद्घाटन पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान तथा सेवा निवृत प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह वर्मा ने किया। उन्होंने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के इस दौर में रामलीला उत्सवों के आयोजन का बड़ा महत्व है।

उन्होंने कहा कि आज के स्वार्थ एवं अवसरवाद के सामाजिक माहौल में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र चित्रण पर आधारित यह रामलीला नाटक समाज में धार्मिक चेतना के साथ-साथ एक प्रेरणा के स्रोत के रूप में अहम भूमिका निभाता है। आयोजन के लिए श्री रामलीला कमेटी कोटली को बधाई देते हुए ठाकुर सिंह वर्मा ने 11000 रुपए की नकद राशि आयोजकों को सहयोग के रूप में भेंट की।

इस अवसर पर उनके साथ उनकी धर्मपत्नी शीतला देवी, पुत्रवधू चंद्रेश एवं मीना देवी, पोता कार्तिक एवं पोती पलक भी उपस्थित रहे। इससे पूर्व आयोजन स्थल किसान भवन पहुंचने पर फूल मालाओं एवं ढोल नगाड़ों के साथ मुख्य अतिथि ठाकुर सिंह वर्मा का जोरदार स्वागत किया गया। कमेटी के प्रधान प्रशांत मोहन, उप प्रधान जीवानंद, सुरजन, निदेशक नरेश ठाकुर, सह सचिव पवन कुमार,कोषाध्यक्ष कमल किशोर, महिला मंडल कोटली की प्रधान अंजलि, पूर्व प्रधान शीला शर्मा, इत्यादि ने मुख्य अतिथि एवं उनके साथ आए अतिथियों को शॉल टोपी एवं स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री रामलीला कमेटी कोटली की ओर से वर्ष 2027 के लिए छपाई गई डायरी का विमोचन भी मुख्य अतिथि ठाकुर सिंह वर्मा के हाथों किया गया।

सेवानिवृत्ति पुलिस निरीक्षक कृष्ण चंद्र ठाकुर, सेवानिवृत्ति कानूनगो बृजलाल ठाकुर, सेवानिवृत्ति मुख्याध्यापक कश्मीर सिंह तथा रामलीला के पूर्व कलाकार भूरी सिंह को भी इस मौके पर टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। रामलीला के दृश्यों में नारद मोह के दृश्य दिखाए गए। जिसमें नारद जी का अहंकार भंग करने के लिए विष्णु भगवान एक लीला रचाते हैं। उन्हें वानर का रूप देकर महाराज सील निधि की कन्या विश्व मोहिनी के स्वयंवर में भेज देते हैं। लेकिन विश्व मोहिनी स्वयंवर के दौरान विष्णु भगवान को वरमाला पहनाकर उनसे विवाह कर लेती है। नारद जी इस पर क्रोधित होकर विष्णु भगवान को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार उन्हें पत्नी के वियोग में तड़पना पड़ा है इस प्रकार अगले जन्म में हुए भी पत्नी वियोग में भटकते फिरेंगे उधर एक अन्य दृश्य में रावण जंगल में घूमते हुए वेदवती को अकेले पाकर उनसे छेड़छाड़ करता है। वेदवती क्रोधित होकर खुद को अग्नि में भाषण कर देती है और रावण को श्राप देती है कि अगले जन्म में तेरा कल बनकर पैदा हूंगी। इसके बाद रावण का पुत्र में मेघनाथ कर के रूप में ऋषि मुनियों से उनका रक्त निकाल लाता है। रक्त से भरे हुए उसे घड़े को रावण के आदेश पर मिथिला पुरी की सीमा में गाढ़ दिया जाता है ।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा