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गुलेरी जयंती : साहित्यकार को वर्तमान समय और समाज को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए : प्रो. रवि शेखर

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गुलेरी जयंती : साहित्यकार को वर्तमान समय और समाज को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए : प्रो. रवि शेखर


गुलेरी जयंती : साहित्यकार को वर्तमान समय और समाज को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए : प्रो. रवि शेखर


मंडी, 07 जुलाई (हि.स.)। कालजयी कहानी उसने कहा था के रचनाकार पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की जिला स्तरीय जयंती का आयोजन भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से संस्कृति सदन मोतीपुर में किया गया। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने बताया कि विभाग की ओर से हर वर्ष मशहूर साहित्यकारों की जयंती मनाई जाती है। इसी कड़ी में जिला स्तर पर यह आयोजन भी किया गया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगा राम राजी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जबकि मुंबई से पधारे फिल्म स्टोरी रायटर प्रोफेसर रवि शेखर इस अवसर के विशिष्ट अतिथि रहे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. रवि शेखर ने पंउित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी के अंश का पाठ किया। वहीं पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि साहित्यकार को नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि आज बदल रहा है और हमें भी बदलते समय के साथ अपनी सोच को बदलना चाहिए और अपनी रचनाओं में बदले समय और समाज का चित्रण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम दोगले लोग हैं, मंच पर कुछ कहते हैं और समाज में कुछ अलग तरह से पेश आते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को समजा से जुड़ने के साथ-साथ आपस में भी अडउेबाजी करते हुए एक दूसरे की रचनाओं को सुनना और सुनाना चाहिए। दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। पहले सत्र में इस अवसर पर साहित्यकार मुरारी शर्मा ने पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी के साहित्य में राष्ट्रीय एवं सामाजिक चेतना विषय पर पत्र वाचनकिया। जिस पर डा.गंगा राम राजी, रेवती सैनी, कवि सुरेंद्र मिश्रा, डॉ मनोहर अनमोल, प्रकाश चन्द्र धीमान आदि ने सारगर्भित टिप्पणी की। जबकि दूसरे सत्र में करीब दो दर्जन कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

वरिष्ठ कवि जगदीश कपूर ने गज़ल सुनाते हुए कहा- अच्छा लगता है बाजार का मौसम...हमसे पूछो न प्यार का मौसम,हर इक है बहार का मौस। वहीं पर मुरारी शर्मा ने अपनी कविता जरा बताओ तो सही में कहा- जीवन की वास्तविकता से इतर तुम्हारी व्याख्या में कुछ और है बताओ तो सही। इसके अलावा भीम सिंह परदेसी ने खुफिया तंत्र की जीवटता पर कविता कही, वहीं रूपेश्वरी शर्मा ने अपनी कविता में कहा - मैं यशेधरा निहारती रही तुमहारा पथ, आंखों से सुनती रही तुम्हारी गाथाएं कि तुम बुद्धहो गए और मैं?

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा