महिला आरक्षण की आड़ में राजनैतिक लाभ लेने की फिराक में थी भााजपा: चंद्रशेखर
मंडी, 23 अप्रैल (हि.स.)। कांग्रेस के विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण बिल की आड़ में भाजपा अपने पुरूषवादी एजेंडे को लागू करने की फिराक में थी। जिसे विपक्ष की एकजुटता ने यह साबित कर दिया कि विपक्ष की आवाज को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि महिला आरक्षण का पहला संशोधन वर्ष 1996 में पारित हो गया था। मगर उस समय की विपक्षी पार्टी के रूप में भाजपा ने इसमें ओबीसी को शामिल करने की बात कर अड़ंगा अड़ा दिया।
उन्होंने कहा कि 1976 में जनसंख्या नियंत्रण को आधार मान कर 25 सालों के भातर इसे लागू करने की बात कही गई थी। लेकिन 2021 में कोरोना की वजह से देश में गणना नहीं हो पाई। जबकि कोरोना का टीकाकरण के चलते 220 करोड़ वैक्सीन लगाई गई। इसके बावजूद सौ करोड़ आबादी का डिजिटलाईजेशन नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि अगर जनसंख्या के आधार पर इस बिल को लागू करने की कवायद की जाती तो सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा 138 सीटें मिलती । जबकि दक्षिण भारत और पूर्वाेतर के राज्य इस मामले में पिछड़ जाते। जिसके दूरगामी परिणाम होते। देश के सात राज्यों में इसका नुक्सान होता।
चंद्रशेखर ने कहा कि दरअसल भाजपा का उद्देश्य महिला आरक्षण बिल लागू करना नहीं था। चार राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान संसद में यह बिल लाकर भाजपा चुनावी फायदा लेने की फिराक में थी। जिस तरह से बंगाल में एसआरसी लागू करके सियासी फायदा उठाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि इसके पश्चात संसद में सांसदों की संख्या 850 होनी थी, जिसमें 567के करीब पुरूष और 283 के करीब महिला सांसद होनी थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

