पुलिस व नगर निगम की बैठक : ट्रैफिक, सुरक्षा और चिट्टा के खतरे को कम करने पर मंथन
शिमला, 09 मार्च (हि.स.)। राजधानी शिमला में शहर की सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए पुलिस और नगर निगम के बीच पहली बार एक संयुक्त संवाद बैठक आयोजित की गई।
सोमवार को पुलिस मुख्यालय में हुई इस बैठक में नगर निगम शिमला के महापौर और कई पार्षदों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने की, जबकि राज्य पुलिस और जिला शिमला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
पुलिस महानिदेशक ने बैठक की शुरुआत में महापौर और पार्षदों का स्वागत करते हुए कहा कि यह अपने तरह की पहली पहल है, जिसका मकसद पुलिस प्रशासन और नगर निगम के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। उन्होंने कहा कि शहर से जुड़े कई मुद्दे ऐसे होते हैं, जिनका समाधान दोनों संस्थाओं के आपसी सहयोग से ही संभव है। इसलिए यह बैठक नियमित और संरचित संवाद की शुरुआत है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और शहर से जुड़े अन्य मुद्दों पर मिलकर काम किया जा सकेगा।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि नगर निगम के पार्षद अपने-अपने वार्डों में लोगों के सबसे नजदीक होते हैं और उन्हें ट्रैफिक व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा, नशे की समस्या और अवैध गतिविधियों से जुड़ी शिकायतें सबसे पहले मिलती हैं। ऐसे में पार्षदों से मिलने वाली जानकारी और सुझाव पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे स्थानीय स्तर की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने और उन पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
बैठक में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली यानी ERSS-112 के कामकाज की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस प्रणाली की राष्ट्रीय रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है। कुछ महीने पहले तक यह प्रणाली देश में 34वें स्थान पर थी, जबकि अब यह पहले स्थान पर पहुंच गई है। अधिकारियों के मुताबिक यह उपलब्धि बेहतर समन्वय, टीम की मेहनत और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने से संभव हो पाई है। ERSS-112 संकट में फंसे लोगों तक जल्दी मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है।
बैठक के दौरान शहर की सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और नशे की समस्या, खासकर “चिट्टा” के बढ़ते खतरे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि नशा एक गंभीर सामाजिक समस्या है और इससे निपटना केवल पुलिस या कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए संभव नहीं है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के बिना नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया जा सकता।
नगर निगम शिमला के महापौर और पार्षदों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह की बैठकों से शहर की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने और समाधान निकालने में मदद मिलेगी। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों से जुड़े कई मुद्दे भी बैठक में उठाए। इनमें ट्रैफिक जाम, सुरक्षा व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग और नशे से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देने की मांग शामिल रही।
बैठक के दौरान कई पार्षदों ने अपने वार्डों में नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता भी जताई। उन्होंने कुछ इलाकों को संभावित नशा हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित करते हुए पुलिस से वहां निगरानी बढ़ाने का अनुरोध किया। पार्षदों ने खास तौर पर स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास दिन-रात गश्त बढ़ाने की मांग की, ताकि युवाओं को नशे के जाल में फंसने से रोका जा सके।
इस पर पुलिस महानिदेशक ने आश्वासन दिया कि पुलिस विभाग इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के साथ मिलकर शहर में नशे की समस्या पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और जरूरत के मुताबिक गश्त और निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

