हिमाचल पंचायत चुनाव मामला पहुंचा उच्चतम न्यायालय
शिमला, 04 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनाव को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर गहराती दिख रही है। सुक्खू सरकार ने पंचायत चुनाव से जुड़े हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर कर दी है। सरकार के इस कदम से राज्य में पंचायत चुनाव और आगे टलने की सम्भावना जताई जा रही है। फिलहाल उच्चतम न्यायालय में यह याचिका सुनवाई के लिए लंबित है।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए थे कि 28 फरवरी तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर हर हाल में लागू किया जाए और 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराए जाएं। इन आदेशों के बाद चुनाव प्रक्रिया की शुरुआती तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। इसी बीच राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है।
सरकार की ओर से दायर एसएलपी में पंचायत चुनाव से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं का हवाला दिए जाने की संभावना है। जानकारी अनुसार राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क रख सकती है कि पंचायत चुनाव हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम के तहत होते हैं, जबकि राज्य में इस समय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 लागू है, जो संसद द्वारा बनाया गया केंद्रीय कानून है।
गौरतलब है कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है, जबकि 47 नगर निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी 2026 को पूरा हो गया था। इसके बाद सरकार ने पंचायतों और नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी है। ग्राम पंचायतों में खंड विकास अधिकारी, पंचायत समितियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जिला परिषदों में सीईओ को अस्थायी तौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश में कुल 3577 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पंचायत क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 55 लाख से अधिक है। मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन शुरू हो चुका है और चुनाव कार्यक्रम घोषित होने तक नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस बीच विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा है कि यह मामला सरकार बनाम सरकार जैसा हो गया है, क्योंकि एसएलपी में राज्य निर्वाचन आयोग और सभी जिलों के उपायुक्तों को भी पक्षकार बनाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

