राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: मंडी में सजी हस्तकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी, 130 बुनकरों ने लिया भाग
मंडी, 07 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय, शिमला द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मंडी में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत सेरी मंच पर 7 से 11 अगस्त तक चलने वाली हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री का शुभारंभ मंडलायुक्त डॉ. राज कृष्ण परुथी ने किया। इस प्रदर्शनी में 15 स्टॉल लगाए गए हैं। जिनमें हिमाचल के बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार किए गए हथकरघा वस्त्र, हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। जिसमें खादी उत्पादों के लिए भी विशेष स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। इस अवसर पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके पश्चात होटल राजमहल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में मंडी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 130 बुनकरों ने भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्यअतिथि मंडलायुक्त डॉ. राजकृष्ण परुथी ने इस दौरान आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले बुनकरों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को ऑन लाइन बिक्री के अलावा राष्ट्रीय राजमार्गाें के किनारे उपयुक्त स्थान मुहैया करवाकर अपने उत्पाद बेचने की सुविधा प्रशासन की ओर से प्रदान की जाएगी। विशेषकर सुंदरनगर एवं पंडोह के आसपास इस तरह के स्थान चिन्हित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने हथकरघा बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आह्वान किया कि वे सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी महिला की घर और समाज में अलग पहचान होती है। कार्यक्रम में नाबार्ड हिमाचल प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और सरोआ हैंडलूम प्रोड्यूसर कंपनी के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हथकरघा उद्योग ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम में बीते कल केंद्रीय विद्यालय मंडी में आयोजित निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। जिसमें चित्रकला प्रतियोगिता में अहाना प्रथम,वैशाली द्वितीय और आराध्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में मनित भाटिया प्रथम, सुभाषिनी द्वित्तीय और मुस्मान तृत्तीय स्थान पर रही। सभी विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह तथा प्रथम, द्वित्तीय और तृत्तीय स्थान पर रहने वालों को क्रमशः 3000, 2000 और 1000 रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान अनुभवी हथकरघा कारीगरों को भी सम्मानित किया गया। वहीं पर प्रसिद्ध बुनकर एवं नारी सखी पुरस्कार से सम्मानित अंशुल मल्होत्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बुनकरों को नवाचार अपनाने और पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। वहीं पर एनएसआईसी के महाप्रबंधक लोकेश भाटिया ने एमएसएमई के बारे में समूहों को जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक नेहा चौहान, लीड बैंक मैनेजर, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के अधिकारी, एनएसआईसी, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, उत्पादक संगठनों तथा बड़ी संख्या में बुनकरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने हथकरघा उत्पादों की ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर बल दिया। इस अवसर पर सरोआ हैंडलूम कंपनी की ओर से प्रकाशित लीफलेट का भी विमोचन किया गया। सहयोगी संस्था मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति की ओर से उपाध्यक्ष जोगिंद्र वालिया ने इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में उपस्थित सभी बुनकरों एवं गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति के कार्यक्रमों एवं नाबार्ड से समिति के जुड़ाव एवं सरोआ हैंडलूम कंपनी के बारे में भी जानकारी उपलब्ध करवाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

