मिड डे मील वर्करों की बैठक, 22 जून की हड़ताल सफल बनाने का आह्वान
शिमला, 11 अप्रैल (हि.स.)। शिमला जिले के सुन्नी खंड में मिड डे मील वर्कर यूनियन (सीटू से संबंधित) की एक बैठक शनिवार को पुष्पा शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में मिड डे मील वर्करों ने भाग लिया और अपनी लंबे समय से लंबित समस्याओं तथा मांगों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान यूनियन नेताओं ने 22 जून को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल और शिमला में होने वाली विशाल रैली को सफल बनाने का आह्वान किया।
बैठक को सीटू शिमला जिला कोषाध्यक्ष बालक राम, यूनियन नेता पुष्पा शर्मा, चंपा देवी और शीला देवी ने संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि मिड डे मील वर्करों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब उन्हें मनवाने के लिए संघर्ष तेज करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि वर्करों को राहत मिल सके।
बैठक में वर्करों ने मांग उठाई कि उन्हें हरियाणा सरकार की तर्ज पर सात हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के अनुसार दस महीने के बजाय बारह महीने का वेतन तुरंत लागू किया जाए। इसके अलावा वर्करों को ग्रेच्युटी, कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा जैसी सुविधाओं के दायरे में लाने की भी मांग की गई।
यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि मिड डे मील वर्करों की नियुक्ति से जुड़ी 25 बच्चों की शर्त हटाई जाए और केंद्रीय रसोई, क्लस्टर योजना, ठेके पर काम देने और गैर-सरकारी संस्थाओं को काम सौंपने जैसे फैसले वापस लिए जाएं। साथ ही 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार मिड डे मील वर्करों को मजदूर का दर्जा देने की मांग भी दोहराई गई, ताकि उन्हें न्यूनतम वेतन सहित अन्य श्रम कानूनों का लाभ मिल सके।
बैठक में यह मांग भी उठाई गई कि मिड डे मील योजना को 10+2 तक के बच्चों के लिए लागू किया जाए, वर्करों को नियमित छुट्टियां दी जाएं, हर महीने की पहली तारीख को समय पर वेतन मिले और साल में दो वर्दियां दी जाएं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती में मिड डे मील वर्करों को प्राथमिकता देने और अतिरिक्त काम के लिए अलग से भुगतान करने की मांग भी रखी गई।
यूनियन नेताओं ने कहा कि बंद या मर्ज किए जा रहे स्कूलों के मिड डे मील वर्करों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने की प्रक्रिया जारी रखी जाए। चुनाव के दौरान उनसे पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन बनवाने का काम न लिया जाए, और यदि ऐसा काम लिया जाता है तो अन्य कर्मचारियों की तरह यात्रा भत्ता और दिहाड़ी दी जाए। साथ ही प्रत्येक स्कूल में दो मिड डे मील वर्करों की नियुक्ति सुनिश्चित करने और शिक्षा विभाग के 21 अगस्त 2023 के आदेश को सख्ती से लागू करने की भी मांग की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

