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हिमाचल के छह मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 320 सीटें बढ़ीं, 597 सीटों पर होगा दाखिला: मुख्यमंत्री सुक्खू

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हिमाचल के छह मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 320 सीटें बढ़ीं, 597 सीटों पर होगा दाखिला: मुख्यमंत्री सुक्खू


शिमला, 18 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा शिक्षा की सीटें 277 से बढ़ाकर 597 कर दी गई हैं। इससे प्रदेश में पीजी की 320 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध हुई हैं। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सीटें बढ़ने से युवा डॉक्टरों को प्रदेश में ही विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के अधिक अवसर मिलेंगे और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने रविवार को शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के चरण-4 के ब्लॉक-1 और ब्लॉक-2 का लोकार्पण भी किया। इस निर्माण कार्य पर करीब नौ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विकास के साथ आधारभूत ढांचे का विस्तार भी जरूरी है। सचिवालय भवन का विस्तार किया गया है और जल्द ही इसमें कार्यालय स्थानांतरित किए जाएंगे।

आईजीएमसी शिमला में सबसे अधिक 91 सीटें बढ़ीं

मुख्यमंत्री के अनुसार इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में पीजी सीटें 139 से बढ़ाकर 230 की गई हैं। यहां 91 सीटों की वृद्धि हुई है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज, टांडा में सीटें 99 से बढ़कर 156 हो गई हैं। मंडी के श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज में सीटें 24 से बढ़ाकर 79 की गई हैं।

इसी तरह डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज, नाहन में पीजी सीटें तीन से बढ़ाकर 35 की गई हैं। चंबा के पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज में सीटें चार से बढ़ाकर 32 हुई हैं। हमीरपुर के डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों की संख्या आठ से बढ़ाकर 65 की गई है।

एक साल में डॉक्टरों की उपलब्धता 85 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने, विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनों को बदलकर एम्स स्तर की आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चार वर्ष पहले प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता करीब 35 प्रतिशत थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 70 प्रतिशत से अधिक किया है। सरकार ने आगामी एक वर्ष में इसे 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। रेडियो डायग्नोसिस सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। सरकार का प्रयास है कि इन सेवाओं के लिए मरीजों को इंतजार न करना पड़े।

स्वास्थ्य सेवाओं से हर साल 1,000 करोड़ रुपये बचने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के लोगों को अपने घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उनके अनुसार, इससे प्रदेशवासियों के हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये बचने की उम्मीद है, क्योंकि विशेषज्ञ इलाज के लिए उन्हें दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।

एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग का गठन किया गया है। आयोग विस्तृत अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा