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हिमाचल के छायाकार बीरबल शर्मा को फोटोग्राफी अखिल भारतीय प्रतियोगिता में मिला गोल्ड

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हिमाचल के छायाकार बीरबल शर्मा को फोटोग्राफी अखिल भारतीय प्रतियोगिता में मिला गोल्ड


हिमाचल के छायाकार बीरबल शर्मा को फोटोग्राफी अखिल भारतीय प्रतियोगिता में मिला गोल्ड


मंडी, 25 अक्टूबर (हि.स.)। मणिकर्णिका आर्ट गैलरी द्वारा आयोजित 54 वीं अखिल भारतीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता में हिमाचल के वरिष्ठ छायाकार बीरबल शर्मा को गोल्ड मेडल मिला। हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी के संस्थापक छायाकार बीरबल शर्मा को यह गोल्ड मेडल उनके दो छाया चित्रों पर हासिल हुआ है। 13 से 22 अक्तूबर तक चली इस प्रतियोगिता में देश भर के 43 छायाकारों ने भाग लिया। 10 दिन तक इसकी प्रदर्शनी भी चली। चयनकर्ताओं ने बीरबल शर्मा के दो छायाचित्रों को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए उन्हें गोल्ड मेडल घोषित किया।

बीरबल शर्मा ने बताया कि हर छायाकार से पांच छायाचित्र मांगे गए थे, जिनमें से दो-दो छायाचित्रों का चयन किया गया था। बीरबल शर्मा ने भी पांच छायाचित्र इस प्रतियोगिता के लिए भेजे थे, जिनमें से दो का चयन हुआ। इनमें एक स्पीति घाटी के तांदी संगम का विहंगम नजारा और दूसरा बीते सितंबर महीने में उस समय क्लिक किया गया था जब उन्होंने इस आयु में भी यूला कांडा जैसी कठिन यात्रा की । उस दौरान समुद्रतल से लगभग 12 हजार फीट पर नीरू घास चरने गई भेड़ें जो सरपट आगे से आगे दौड़ती जा रही थी तथा सबसे आगे चल रही एक बकरी पीछे मुड़ कर सबको देख रही थी, खास कर सबसे पीछे चल रहे मेमनों पर उसकी नजर थी, का चित्र था।

हिमाचल गौरव अवार्ड से सम्मानित बीरबल शर्मा का इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद बस इतना ही कहना था कि कोई भी पुरस्कार या मेडल लक्ष्य को पाने की दिशा में बढ़ रहे कदमों को और मजबूत करता है। इससे भी उन्हें अपने लक्ष्य जो बार-बार उजड़ते हिमाचल दर्शन को फिर से और अधिक विस्तारित रूप में स्थापित करने का है को पाने में मददगार साबित होगा।

बीरबल शर्मा ने कहा कि यह मेडल सभी उन मित्रों व प्रशंसकों को समर्पित करता हूं जो उनको इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए हर कदम पर प्रेरित करते हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा कि मंडी का नाम देश व दुनिया में रोशन होता रहे। बीरबल शर्मा ने प्रतियोगिता के लिए पांच फोटो भेजे थे, उनमें से दो चयनित हुए । समुद्रतल से लगभग 12 हजार फीट की उंचाई पर इन दिनों उगी नीरू घास चरती हुई भेड़ों की यह रेवड़, इसमें रोचक पहलू यह है कि अपने को वरिष्ठ मान कर आगे चल रही एक बकरी उपर से पीछे देख रही है कि सभी आ गए कि नहीं, यही नहीं इसमें सबसे पीछे चल रहे छोटे मेमने भी एक अलग फिलिंग देते नजर आ रहे हैं। यह चित्र 12 सितंबर 2026 को किन्नौर जिले में स्थित यूला कांडा झील के दौरे के दौरान लिया गया था।

उन्होंने बताया कि दूसरा चित्र मंडी मनाली लेह के बीच स्थित बारालाचा दर्रे से अलग अलग दिशाओं में निकलती हैं चंद्रा व भागा नदी जो फिर केलंग के पास तांदी में मिलती है। इसके बाद इसका नाम चंद्रभागा नदी और जब यह जम्मू कश्मीर व पाकिस्तान में पहुंचती है तो इसे चनाब का नाम मिल जाता है। यह संगम अद्भुत है। इस लाहुल स्पीति के लोग हरिद्वार की तरह पवित्र मानते हैं। साल भर यहां पुण्य स्नान भी चलते हैं और अस्थियों को विसर्जन भी यहां कर दिया जाता है। यह चित्र बीते साल अक्तूबर महीने में उतारा गया है जिसमें घाटी की एक अलग ही सुंदरता का वर्णन होता दिख रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा