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शिमला : गैस सिलेंडर खत्म होने से आईजीएमसी अस्पताल की कैंटीन में खाना बंद

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शिमला, 15 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में व्यावसायिक एलपीजी गैस की कमी अब आम लोगों के साथ-साथ अस्पतालों तक पहुंच गई है। शहर में कई ढाबों और रेस्टोरेंट के बाद अब अस्पतालों में चल रही निजी कैंटीनों पर भी इसका असर दिखने लगा है। हालात यह हैं कि शिमला के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) की कैंटीन में पिछले दो दिनों से खाना बनना बंद हो गया है, जिससे मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण आईजीएमसी और कमला नेहरू अस्पताल में चल रही कैंटीनों के सिलेंडर खत्म हो गए हैं। नए सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण कैंटीन संचालक भोजन तैयार नहीं कर पा रहे हैं। आईजीएमसी की कैंटीन में दो दिनों से मरीजों और तीमारदारों के लिए खाना नहीं बन रहा है।

कैंटीन संचालक का कहना है कि उनके पास गैस सिलेंडर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और फिलहाल नए सिलेंडर नहीं मिल पा रहे। ऐसे में मजबूरी में कैंटीन में केवल चाय-पानी ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। भोजन की व्यवस्था ठप होने से अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ आए परिजनों को खाने के लिए अस्पताल के बाहर भटकना पड़ रहा है।

अस्पताल के आसपास के कई ढाबों पर भी इस गैस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई ढाबों में गैस सिलेंडर खत्म हो चुके हैं और कुछ बंद होने की कगार पर हैं। ढाबा संचालकों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अपना काम बंद करना पड़ सकता है।

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों और तीमारदारों पर पड़ रहा है जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए शिमला पहुंचे हैं। कई लोगों ने बताया कि अस्पताल की कैंटीन बंद होने के कारण उन्हें खाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कुछ लोग महंगे होटलों या दूर के ढाबों पर जाकर खाना लेने को मजबूर हैं, जिससे परेशानी और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी जगहों पर खाने की व्यवस्था बंद होना बड़ी समस्या है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द कोई समाधान निकालना चाहिए। कई लोगों ने सुझाव दिया है कि अगर व्यावसायिक गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो अस्पताल की कैंटीनों के लिए अस्थायी तौर पर घरेलू गैस सिलेंडर या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को परेशानी न झेलनी पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा