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केके फाउंडेशन बुक क्लब में गालिब की शायरी पर हुई चर्चा

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केके फाउंडेशन बुक क्लब में गालिब की शायरी पर हुई चर्चा


मंडी, 09 अक्टूबर (हि.स.)। मंडी नगर निगम के तहत पंजैहटी में स्थापित कला ग्राम की कलात्मक गतिविधियों में कालरू कॉयथ फाऊंडेशन की मुहीम जारी है। इसी कड़ी में केके फाऊंडेशन के अंतर्गत गठित बुक क्लब की मासिक बैठक नील तारा मात्री निलय परिसर में आयोजित हुई। इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों का स्वागत अर्चना कपूर द्वारा किया गया तथा पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत मिर्ज़ा असदउल्लाह खां गालिब' ( 1797 - 1869 ) पर चर्चा प्रारम्भ की गई।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए महेश कपूर ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा हालांकि, गालिब का ज्यादातर लिखा हुआ फारसी में है। क्योंकि उन दिनों उर्दू का प्रयोग शान के खिलाफ़ माना जाता था। परंतु गालिब छोटे से छोटे विषय को भी अपनी कलम के बल से महत्वपूर्ण बना देते थे। गालिब के समकालीन ज़ौक़, मोमिन व बहादुरशाह जफर हुए । उस समय एक शायरी का जो ख़ाका बन गया था वह काफ़ी देर तक चलता रहा। परंतु समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदल जाता है, उसी प्रकार शायरी में भी बदलाव आया है। इस दौरान मिर्ज़ा गालिब के मशहूर शेयरों पर भी चर्चा हुई जैसे, इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के।

चर्चा में भाग लेते हुए रजनीश शर्मा व अरविंद सिंह चौहान ने भी मिर्जा गालिब के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और उनकी फ़ाका मस्ती को उजागर करते हुए बहुत से शेयर सुनाए । जिससे महौल एकदम जीवंत और खुशनुमां हो गया । इसके पश्चात अगली मासिक सभा के लिए लेखक व उसकी पुस्तक को पढ़ने पर भी निर्णय लिया गया है। जिसमें रूसी साहित्यकार एवं उपन्यासकार, फेयोदोर दोस्तोएवस्की (1821 -1881 ) की दो पुस्तकों व्हाइट नाईटस तथा जिसे अस्तित्ववाद का पहला उपन्यास माना जाता है नोटस फ्राम अंडरग्राउंड में से जो भी उपलब्ध होगी को पढ़ने के पश्चात उस पर चर्चा होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा