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सीयू के कुलपति प्रो. बंसल की आत्मकथा ‘संस्कार से संकल्प’ का लोकार्पण

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सीयू के कुलपति प्रो. बंसल की आत्मकथा ‘संस्कार से संकल्प’ का लोकार्पण


सीयू के कुलपति प्रो. बंसल की आत्मकथा ‘संस्कार से संकल्प’ का लोकार्पण


धर्मशाला, 02 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल की आत्मकथा ‘संस्कार से संकल्प’ का नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में लोकार्पण किया गया। इस मौके पर देशभर से विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों, निदेशकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और प्रबुद्धजनों की मौजूदगी रही। ‘संस्कार से संकल्प’ केवल प्रो. बंसल के जीवन की घटनाओं का संकलन नहीं है अपितु यह उन मूल्यों, संबंधों, अनुभवों, संघर्षों और दायित्वों का आत्मपरक प्रतिबिंब है, जिन्होंने उनके शैक्षणिक एवं संस्थागत जीवन को दिशा प्रदान की।

'संस्कार से संकल्प’ आत्मकथा मूल भावना की सार्थक अभिव्यक्ति : इंद्रेश कुमार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, समाजसेवी एवं वरिष्ठ आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार ने प्रो. बंसल की जीवन-यात्रा को ‘संस्कार से संकल्प’ की मूल भावना की सार्थक अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा संस्कार से व्यक्तित्व निर्माण, संकल्प से कर्म और कर्म से सामाजिक एवं राष्ट्रीय विकास की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। समर्पण के विषय पर विचार व्यक्त करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि स्वयं को किसी बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित करना कमजोरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और सार्थक कर्म का स्रोत है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने और डिग्री देने वाले संस्थान नहीं हैं अपितु वे मूल्य, दृष्टि, चरित्र और जिम्मेदार नागरिकता के निर्माण के केंद्र भी हैं। उन्होंने शोध में मौलिकता, जीवन में उद्देश्य और नेतृत्व में मूल्यों के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को ज्ञान के साथ जिम्मेदारी तथा व्यावसायिक उत्कृष्टता के साथ सामाजिक प्रतिबद्धता के समन्वय के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति एवं एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. योगेश सिंह ने शैक्षणिक नेतृत्व की जटिलताओं को ‘समुद्र मंथन’ के रूपक के माध्यम से समझाया।

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने प्रो. सत प्रकाश बंसल की जीवन-यात्रा को भारतीय इतिहास, भारतीय चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन केवल उसके द्वारा प्राप्त पदों अथवा उपलब्धियों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. डॉ. हरमोहेंद्र सिंह बेदी, कुलाधिपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, ने प्रो. बंसल के साथ अपने दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंधों और अनुभवों को साझा करते हुए उनके नेतृत्व के मानवीय एवं संस्थागत पक्षों को रेखांकित किया।

व्यक्तित्व की नींव तैयार करते हैं संस्कार : प्रो. बंसल

वहीं पुस्तक के लेखक एवं कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि जीवन में कोई भी उपलब्धि पूर्णतः व्यक्तिगत नहीं होती। प्रत्येक अवसर और सफलता के पीछे परिवार, शिक्षकों, सहकर्मियों, मित्रों तथा समाज का मार्गदर्शन, सहयोग और विश्वास होता है। उन्होंने कहा कि ‘संस्कार से संकल्प’ के माध्यम से वे अपने जीवन के अनुभवों, चुनौतियों और संबंधों से प्राप्त सीख को नई पीढ़ी के सामने रखना चाहते हैं जिससे यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और दिशा का स्रोत बन सके। प्रो. बंसल ने कहा कि संस्कार व्यक्तित्व की नींव तैयार करते हैं, जबकि संकल्प उन मूल्यों को कर्म में परिणत करने की शक्ति प्रदान करता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया