शी जिनपिंग की नाराजगी के बावजूद दलाई लामा से मिला अमेरिकी संसद प्रतिनिधिमंडल
धर्मशाला, 30 सितंबर (हि.स.)। मिनी ल्हासा मैक्लोडगंज में बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस का 10 सदस्यीय दल तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मिला और तिब्बत के मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। चीन की आपत्तियों को नजरअंदाज कर हुई इस मुलाकात से शी जिनपिंग सरकार नाराज है। मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ब्रायन मास्ट ने मीडिया से भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन के दमन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
मास्ट ने बताया कि दलाई लामा के साथ चीन और तिब्बती लोगों की आजादी पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने दलाई लामा को स्वतंत्रता का प्रतीक बताया और कहा कि अमेरिका और तिब्बत स्वतंत्रता व लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, जो चीन से अलग है।
मास्ट ने चीन पर जासूसी, पुलिस भेजने, लोगों के अंग निकालने और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि चीनी सरकार तिब्बतियों और उइगरों का दमन कर रही है, जिसके खिलाफ अमेरिकी संसद
आवाज उठाती रहेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान सांसद हेली स्टीवंस ने कहा कि जब दुनियाभर में स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं, तब दलाई लामा और अमेरिकी नेतृत्व मिलकर खड़े हैं, जो चीन के सूचना नियंत्रण व दमन के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
दलाईलामा से मिलने पहुंचे रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों में ब्रायन मास्ट, स्कॉट फ्रैंकलिन, वॉरेन डेविडसन, जेम्स गैलाघर कार्लोस गिमेनेज और जिमी पेट्रोनिस सहित भारतीय मूल के सांसद श्रीथानेदार, यासमीन अंसारी, हेली स्टीवंस और जॉर्ज व्हाइटसाइड्स शामिल हैं।
उधर दलाई लामा के पुनर्जन्म पर चीन की दखलअंदाजी पर सांसद मास्ट ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने की कोशिशों पर कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। चीन पहले भी परमपावन द्वारा नामित उत्तराधिकारियों और सहयोगियों का अपहरण कर चुका है, जो आज तक नहीं दिखे। तिब्बत के लोगों को दबाने के लिए चीन किसी भी हद तक जा सकता है-चाहे किसी का अपहरण करना हो, पूरे परिवार को गायब करना हो या फिर अपना लामा थोपना हो। उनका यह दोहरा चरित्र पूरी दुनिया के सामने है। उन्होंने कहा कि चीन हमारी इस मुलाकात से चिढ़ेगा, पर अमेरिका पीछे नहीं हटेगा। मास्ट ने स्पष्ट किया कि धर्मशाला में दलाई लामा के साथ उनकी मौजूदगी ही चीन को चुभेगी।
उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट चीनी सरकार दलाई लामा के अस्तित्व और मौजूदगी से ही नफरत करती है। निश्चित तौर पर बीजिंग से इस दौरे और हमारे सांसदों के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया आएगी, लेकिन अमेरिका दुनिया भर में स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा।
अमेरिकी सांसदों की दलाई लामा से यह सीधी मुलाकात चीन के लिए एक कड़ा भू-राजनीतिक झटका है। अमेरिका पहले भी 'तिब्बत-चीन विवाद समाधान अधिनियम' जैसे कड़े कानूनों के जरिए बीजिंग पर दबाव बनाता रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

