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टांडा मेडिकल कॉलेज में हर साल 6 लाख मरीज करवाते हैं उपचार, कॉलेज को लेकर ना हो राजनीति : बाली

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टांडा मेडिकल कॉलेज में हर साल 6 लाख मरीज करवाते हैं उपचार, कॉलेज को लेकर ना हो राजनीति : बाली


धर्मशाला, 24 अक्टूबर (हि.स.)। पर्यटन निगम के अध्यक्ष एवं नगरोटा बगवां के विधायक आर.एस. बाली ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र है। कॉलेज की व्यवस्थाओं, उपलब्धियों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार बैठकें की जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेज शिमला और टांडा हैं, जहां हर वर्ष लाखों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

शनिवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में वर्ष 1999 में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हुई थीं। उस समय विकास पुरुष स्वर्गीय जी.एस. बाली यहां के विधायक थे तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने इस संस्थान की नींव रखी थी। आज इस संस्थान से हजारों डॉक्टर एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त कर लोगों की सेवा में कार्यरत हैं। इसके विकास में यहां कार्यरत डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

आर.एस. बाली ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में टांडा मेडिकल कॉलेज में लगभग 60 लाख मरीजों ने उपचार करवाया है, जो हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी के लगभग बराबर है। यहां हिमाचल के अलावा अन्य राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में टांडा में नर्सिंग स्कूल की शुरुआत भी विकास पुरुष स्वर्गीय जी.एस. बाली के प्रयासों से हुई थी। उस समय जीएनएम की 30 सीटों के साथ नर्सिंग शिक्षा शुरू हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बीएससी नर्सिंग कॉलेज की शुरुआत करवाई गई, जिसमें 60 सीटें स्वीकृत हुईं। अब इन सीटों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में टांडा मेडिकल कॉलेज को विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों में लगभग 1000 नई सीटों की सौगात मिली है। बीएससी एमएलटी, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन और रेडियोलॉजी से संबंधित पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 60 की गई है। इसके अतिरिक्त रेडियोथेरेपी में 30 नए विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है जो पहले नहीं थीं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया