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तिब्बत मुद्दे पर ब्लैक हैट मार्च का आगाज, चीन की नीतियों के खिलाफ दिल्ली कूच

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तिब्बत मुद्दे पर ब्लैक हैट मार्च का आगाज, चीन की नीतियों के खिलाफ दिल्ली कूच


धर्मशाला, 31 मार्च (हि.स.)। तिब्बती समुदाय द्वारा चीन की नीतियों के विरोध में ब्लैक हैट मार्च के तहत मंगलवार को दिल्ली कूच किया। यह मार्च धर्मशाला से संयुक्त राष्ट्र कार्यालय नई दिल्ली तक निकाला जाएगा। 25 दिनों की लंबी पदयात्रा के बाद ये दल दिल्ली पहुंचेगा। इस दौरान आज धर्मशाला में चीन सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य तिब्बत पर चीन के कथित अवैध कब्जे और तिब्बती संस्कृति पर हो रहे हमलों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज उठाना है। साथ ही चीन की ओर से हाल ही में शुरू किए गए नए कानून का भी कड़ा विरोध जताया है, जोकि तिब्बतियों के अधिकारों का हनन करता है।

तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष छेरिंग चुंबेल ने कहा कि तिब्बत पर चीन का नियंत्रण 1949 में शुरू हुआ, जिसके बाद 1951 में तथाकथित ‘सत्रह सूत्रीय समझौते’ को दबाव में लागू किया गया और 1959 तक पूरे तिब्बत पर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद से तिब्बती भाषा, धर्म, संस्कृति और पर्यावरण को व्यवस्थित तरीके से खत्म करने का आरोप लगाया गया है। बयान में दावा किया गया है कि लाखों तिब्बतियों को गिरफ्तार, प्रताडि़त और मौत के घाट उतारा गया, जबकि चीन की सिनीसाइजेशन नीति के तहत तिब्बती पहचान को मिटाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में पारित एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस कानून को भी इसी दिशा में एक कदम बताया गया है।

तिब्बती नेताओं का कहना है कि तिब्बत एक प्राचीन और स्वतंत्र सभ्यता रही है, जिसकी अपनी अलग भाषा, संस्कृति और परंपराएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के शासन में तिब्बतियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकार और अपनी भाषा के उपयोग जैसे मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। विशेष रूप से बच्चों को कम उम्र में परिवार से अलग कर सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में भेजे जाने को लेकर भी चिंता जताई गई है। दावा किया गया है कि इन स्कूलों में बच्चों को अपनी भाषा और पहचान से दूर किया जा रहा है। तिब्बती यूथ कांग्रेस ने नए कानून का कड़ा विरोध करते हुए इसे सांस्कृतिक अस्तित्व के लिए खतरा बताया है। संगठन ने सितंबर के चौथे सप्ताह को तिब्बती पहचान संरक्षण सप्ताह और तिब्बती नस्लीय नरसंहार सप्ताह के रूप में मनाने का भी ऐलान किया है।

संगठन ने कहा कि तिब्बत की आजादी बहाल होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन की नीतियों का विरोध किया जाता रहेगा। साथ ही, उन्होंने दुनियाभर के देशों और विशेष रूप से भारत का समर्थन जारी रखने की अपील की। तिब्बती समुदाय ने विश्वास जताया कि एक दिन तिब्बत फिर से स्वतंत्र होगा और सभी तिब्बती एकजुट होकर अपने देश में लौटेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया