धर्मशाला में सड़कों पर उतरे प्राइमरी शिक्षक, कलस्टर और कंपलेक्स सिस्टम का किया विरोध
धर्मशाला, 01 मार्च (हि.स.)। प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन (पीटीएफ) द्वारा कलस्टर और कंपलेक्स सिस्टम को लेकर किया जा रहा विरोध लगातार जारी है। इसी कड़ी में रविवार को जिला भर के सैंकड़ों प्राइमरी शिक्षक अपनी मांगों को लेकर जिला कांगड़ा मुख्यालय धर्मशाला की सड़कों पर उतरे और सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। प्राइमरी टीचर फेडरेशन जिला कांगड़ा का मानना है कि कलस्टर और कंपेलक्स सिस्टम और अन्य मांगों पर वार्ता हेतू सरकार ने पीटीएफ की प्रदेश कार्यकारिणी को नहीं बुलाया तो आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इससे भी बात नहीं बनी तो प्राइमरी टीचर अपने परिवारों सहित धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
गौरतलब है कि 23 सितंबर, 2025 को शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा न्यू कंपलेक्स सिस्टम पर एक अधिसूचना जारी की गई। इस अधिसूचना में प्राथमिक स्कूलों में कार्य कर रहे हजारों एचटी, सीएचटी, बीईईओ की प्रशासनिक शक्तियों को छीनकर कार्य क्षेत्र को सीमित कर दिया गया, ताकि भविष्य में इन पदों को समाप्त किया जा सके। 15 से 20 स्कूलों का एक परिसर बना दिया गया और समस्त प्रशासनिक नियंत्रण व संचालन का कार्य प्रिंसिपल को दे दिया गया। इससे प्रिंसिपल के ऊपर कार्य का बोझ बढ़ेगा और प्राथमिक शिक्षा पूरी तरह से हाशिए पर चली जाएगी। सीबीएसई स्कूल बनाते समय सभी वर्ग के पदों को बनाए रखा गया, परंतु इन स्कूलों से सीएचटी के पदों को समाप्त कर दिया गया। 3,000 से अधिक जेबीटी से एचटी पदों पर प्रमोशन को समाप्त करने पर कार्य किया जा रहा है। इस जारी अधिसूचना से हजारों मिड डे मील वर्कर्स की नौकरी आने वाले समय में खतरे में पड़ने वाली है। जेबीटी के 4,500 से अधिक पद खाली चल रहे हैं, जिन्हें भरा नहीं जा रहा है। यह हजारों प्रशिक्षित जेबीटी बेरोजगारों के साथ अन्याय है। प्राथमिक स्कूलों में 6200 से अधिक नर्सरी टीचर्स तथा इतने ही आया के पद खाली चल रहे हैं। पीटीएफ का आरोप है कि हर तरफ से प्राथमिक शिक्षा को तबाह करने का कार्य किया जा रहा है।
पीटीएफ जिला कांगड़ा के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने कहा कि शीघ्र सरकार ने प्रदेश कार्यकारिणी से वार्ता नहीं की तो आंदोलन उग्र किया जाएगा। कलस्टर, कंपलेक्स सिस्टम लागू किया गया, सीएचटी के पदों को समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दो साल से वार्ता के माध्यम से समस्याओं का हल करने का प्रयास किया जा रहा है। अब सरकार से आग्रह है कि 15 मार्च से पहले प्रदेश कार्यकारिणी से वार्ता करे, अन्यथा प्राइमरी शिक्षकों को उग्र आंदोलन छेड़ना पड़ेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

