ओबीसी संघर्ष समिति ने मांगों को लेकर निकाली कार-बाइक रैली
धर्मशाला, 20 सितंबर (हि.स.)। ओबीसी संघर्ष समिति, हिमाचल प्रदेश द्वारा ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को लागू करवाने तथा सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से रविवार को सामाजिक न्याय यात्रा-2 निकाली गई। पालमपुर से शाहपुर तक आयोजित इस कार-बाइक रैली में ओबीसी समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। रैली का शुभारंभ पालमपुर से हुआ, जहां सुबह से ही ओबीसी समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होना शुरू हो गए थे। पालमपुर से रैली के रवाना होने के बाद मार्ग में विभिन्न स्थानों मलां, हटवास, नगरोटा बगवां, बढ़ाई, बड़ोह रोड़, 53 मील, खोली, पुराना मटौर में पवन काजल कांगड़ा विधायक ने भी इस यात्रा को समर्थन देकर स्वागत किया, जमानवाद, इच्छी, और अंत में बनोई पर स्थानीय लोगों एवं ओबीसी समाज की ओर से रैली का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया।
ओबीसी संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सौरव कौंडल ने कहा कि यह यात्रा केवल एक रैली नहीं, बल्कि समाज के संवैधानिक अधिकारों, समान अवसर और सामाजिक न्याय की मांग को सरकार तक पहुंचाने का लोकतांत्रिक माध्यम है।
रैली का समापन शाहपुर मैदान में हुआ, जहां आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने ओबीसी समाज से जुड़े मुद्दों और संघर्ष समिति की मांगों को प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी समाज लंबे समय से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ओबीसी समाज की लंबित मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण समाज में रोष है। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि वर्ग से संबंधित मांगों को केवल आश्वासनों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सौरभ कौंडल ने कहा कि बीते वर्ष 20 सितंबर 2025 को संघर्ष समिति द्वारा उपायुक्त धर्मशाला के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार को 21 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा गया था। उस मांग-पत्र में ओबीसी समाज के संवैधानिक, शैक्षणिक, रोजगार एवं सामाजिक अधिकारों से संबंधित विभिन्न मांगें उठाई गई थीं, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बावजूद इन मांगों पर अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि ओबीसी सामाजिक न्याय यात्रा-2 का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में खड़ा होना नहीं, बल्कि समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

