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कांगड़ा में केएफडब्ल्यू परियोजना के दूसरे चरण की उम्मीद बढ़ी, जर्मन टीम ने किया चार वन मंडलों का सर्वे

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धर्मशाला, 11 अक्टूबर (हि.स.)।

कांगड़ा जिले में जर्मनी की केएफडब्ल्यू बैंक की वित्तपोषित वन परियोजना के दूसरे चरण के फलीभूत होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसके लिए जर्मनी से आई टीम ने जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों का दौरा कर व्यवहार्यता सर्वेक्षण किया है। टीम ने धर्मशाला, नूरपुर, देहरा और पालमपुर वन मंडलों के अंतर्गत संभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के साथ वन विभाग की मैदानी गतिविधियों का निरीक्षण किया। दौरे के बाद परियोजना को लेकर व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है। हालांकि, दूसरे चरण को मंजूरी देने और इसे लागू करने के स्वरूप पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।

वन वृत्त धर्मशाला की मुख्य अरण्यपाल बासु कौशल ने बताया कि केएफडब्ल्यू परियोजना का दूसरा चरण जल्द शुरू होने की संभावना है। इसी को लेकर हाल ही में जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में व्यवहार्यता सर्वेक्षण किया गया है। जर्मनी की केएफडब्ल्यू बैंक का प्रतिनिधिमंडल चार अक्तूबर को धर्मशाला पहुंचा था। इसके बाद चार से सात अक्तूबर तक टीम ने धर्मशाला, नूरपुर, देहरा और पालमपुर वन मंडलों के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान परियोजना के लिए उपयुक्त संभावित क्षेत्रों का आकलन किया गया।

उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा प्रारंभिक आकलन प्रक्रिया का हिस्सा था। सर्वेक्षण और मैदानी निरीक्षण के आधार पर तैयार रिपोर्ट के बाद ही परियोजना के दूसरे चरण को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल इसे किस रूप में लागू किया जाएगा और किन क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा, इस पर निर्णय होना शेष है।

गौरतलब है कि कांगड़ा जिले में वन विभाग के माध्यम से जायका परियोजना, एकीकृत विकास परियोजना और जर्मनी की वित्तपोषित केएफडब्ल्यू परियोजना सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। एकीकृत विकास परियोजना अंतिम चरण में है, जबकि केएफडब्ल्यू परियोजना का पहला चरण इसी वर्ष 30 मार्च को पूरा हो चुका है। ऐसे में दूसरे चरण की संभावनाओं को लेकर किए गए सर्वेक्षण को जिले में वन विकास से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया